नयी दिल्ली, 21 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने शहर में बाढ़ राहत शिविरों में मुफ्त राशन, स्वास्थ्य सहायता एवं आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका पर 24 जुलाई को सुनवाई करने के लिए शुक्रवार को सहमति जताई।
याचिका मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ के सामने तत्काल सुनवाई के लिए पेश की गई थी। पीठ ने मामले को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में हाल में आई बाढ़ में करीब 25 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। इसमें राहत शिविरों में पर्याप्त स्वच्छता एवं भोजन सुविधाओं के अभाव की शिकायत की गई है।
अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में पूर्व सहायक प्रोफेसर डॉक्टर आकाश भट्टाचार्य ने कहा, “बाढ़ से निपटना राज्य का विषय है, इस मामले में कदम उठाने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों पर है। ”
वकील के आर शियास के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि अभूतपूर्व बाढ़ से वे सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं, जो यमुना के बाढ़ क्षेत्र में रहते हैं।
इसमें कहा गया, "खतरनाक और अभूतपूर्व स्थिति में, राजधानी की राज्य मशीनरी सैकड़ों लोगों के जीवन और आजीविका की रक्षा करने में विफल रही।"
याचिकाकर्ता ने इस बाढ़ को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत प्राकृतिक आपदा के रूप में अधिसूचित करने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की।
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