जरुरी जानकारी | सरकार ने 45 दिन में उद्योगों से 35,000 बोरी कृषि-ग्रेड यूरिया जब्त किया

नयी दिल्ली, छह जून उद्योगों को अत्यधिक सब्सिडी वाले यूरिया की गलत तरीके से बिक्री पर रोक लगाने के लिए सरकार ने एक बड़ा अभियान चलाया है। सरकार ने पिछले डेढ़ महीने में ऐसे यूरिया की लगभग 35,000 बोरियां (प्रत्येक में 45 किलोग्राम) जब्त की हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि इस दुरुपयोग के लिए छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि सात प्राथमिकी (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज की गई हैं।

आमतौर पर यूरिया को ऐसे गलत तरीके से, प्लाईवुड, पशु चारा, क्रॉकरी, डाई और मोल्डिंग पाउडर बनाने वाले उद्योगों को बेचा जाता है। इन उद्योगों को सालाना लगभग 15 लाख टन यूरिया की आवश्यकता होती है।

यूरिया अत्यधिक सब्सिडी वाला उर्वरक है और किसानों को केवल 266 रुपये प्रति बोरी पर बेचा जाता है, जबकि इसकी वास्तविक लागत लगभग 3,000 रुपये प्रति बैग है।

उर्वरक विभाग ने घटिया गुणवत्ता वाले उर्वरकों के दुरुपयोग, कालाबाजारी और आपूर्ति पर रोक लगाने के मकसद से उर्वरक एवं संबंधित इकाइयों का औचक निरीक्षण करने के लिए विशेष टीम 'उर्वरक उड़न दस्ते' का गठन किया है।

कई शिकायतें मिलने के बाद विभाग ने कृषि-ग्रेड यूरिया को इधर-उधर करने और कालाबाजारी को रोकने के लिए एक बहुआयामी रणनीति शुरू की है। यूरिया पर नीम का लेप होने के बावजूद ऐसा हो रहा है।

औद्योगिक ग्रेड यूरिया के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं पर तलाशी अभियान के दौरान 63.4 करोड़ रुपये की माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की चोरी का पता चला है, जिसमें से 5.14 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।

सूत्रों ने कहा कि कृषि-ग्रेड वाले यूरिया के 25,000 बैग का एक बेहिसाब स्टॉक पाया गया और जब्त कर लिया गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जीएसटी अधिनियम के तहत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

कृषि-ग्रेड यूरिया को उद्योगों को बेचने (डायवर्लन करने) में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सीजीएसटी अधिनियम, उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च पिछले साल के 1.62 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में लगभग 2.25 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान है। कृषि क्षेत्र में यूरिया की वार्षिक घरेलू खपत 325-350 लाख टन है।

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