देश की खबरें | गौतम नवलखा की वैधानिक जमानत अदालत से खारिज

मुम्बई, 12 जुलाई मुम्बई की एक विशेष अदालत ने रविवार को एल्गार परिषद मामले के एक आरोपी - सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को वैधानिक जमानत देने से इनकार कर दिया।

नवलखा ने यह दावा करते हुए अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167 के तहत वैधानिक जमानत मांगी कि वह 90 से अधिक दिनों से हिरासत में हैं (लेकिन आरोपपत्र दायर नहीं किया गया है)।

यह भी पढ़े | गुजरात: पिछले 24 घंटों में COVID-19 के 879 नए मामले सामने आए, 13 की मौत : 12 जुलाई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

उन्होंने इस साल 14 अप्रैल को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सामने आत्मसमर्पण किया था। वह नवी मुम्बई की तलोजा जेल में हैं। वह 2018 में 29 अगस्त से एक अक्टूबर तक घर में नजरबंद थे।

उनके वकील ने कहा कि अदालत को घर में उनके मुवक्किल को नजरबंद रखे जाने को भी जांच एजेंसियों की हिरासत की अवधि मानना चाहिए। दूसरा, जांच एजेंसी ने 90 दिनों की निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दायर भी नहीं किया है।

यह भी पढ़े | Coronavirus: महाराष्ट्र में थम नहीं रहा COVID-19 का कहर, पिछले 24 घंटे में 7,827 नए मरीजों की हुई पुष्टि, 173 की मौत.

एनआईए की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि (नवलखा की) यह अर्जी विचारयोग्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने नजरबंदी का आदेश दिया था और यह अवधि सीआरपीसी की धारा 167 के तहत हिरासत नहीं होगी।

एनआईए की बातों से सहमत होते हुए विशेष न्यायाधीश दिनेश कोलठालिकर ने यह दलील खारिज कर दी कि नजरबंदी को हिरासत अवधि माना जाए।

अदालत ने कहा कि नवलखा नजरबंदी के दौरान जांच एजेंसियों की हिरासत में कभी नहीं रहे।

नवलखा को अदालत ने दस दिनों के लिए एनआईए की हिरासत में भेजा था। जांच एजेंसी ने यह कहते हुए हिरासत की मांग की थी कि उसे इस मामले में साजिश का खुलासा करने के लिए उनसे पूछताछ करने की जरूरत है।

अदालत ने नवलखा और अन्य आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ आनंद तेलटुम्बेडे के खिलाफ आरोपपत्र दायर करने के लिए 90 दिनों को बढ़कर 180 दिन करने की एनआईए की मांग मान ली।

नवलखा को एल्गार परिषद माओवादी लिंक मामले में अन्य के साथ गिरफ्तार किया गया था। इस साल जनवरी में यह मामला पुणे पुलिस से लेकर एनआईए को सौंपा गया था।

यह मामला 31 दिसंबर, 2017 में पुणे के एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित उत्तेजक भाषण देने से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार इसी के बाद अगले दिन कोरेगांव भीमा वार मेमोरियल के पास हिंसा हुई थी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)