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हवा प्रणालियों के पूर्वानुमान में मुश्किल के कारण उत्तर भारत के लिए आईएमडी की भविष्यवाणी में खामी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के उत्तर भारत के लिए मानसून के पूर्वानुमान के सही न होने के पीछे मॉडल्स द्वारा भेजे गए गलत सिग्नल, पूर्वी और पश्चिमी हवाओं के बीच संपर्क के नतीजों का अनुमान लगाने में मुश्किल आदि कुछ प्रमुख कारण हैं. विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र को गर्मी से राहत न मिलने पर इन वजहों की ओर इशारा किया है.

हवा प्रणालियों के पूर्वानुमान में मुश्किल के कारण उत्तर भारत के लिए आईएमडी की भविष्यवाणी में खामी
पारा | प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo: Pixabay)

नयी दिल्ली, 11 जुलाई : भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के उत्तर भारत के लिए मानसून के पूर्वानुमान के सही न होने के पीछे मॉडल्स द्वारा भेजे गए गलत सिग्नल, पूर्वी और पश्चिमी हवाओं के बीच संपर्क के नतीजों का अनुमान लगाने में मुश्किल आदि कुछ प्रमुख कारण हैं. विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र को गर्मी से राहत न मिलने पर इन वजहों की ओर इशारा किया है. दक्षिणपश्चिम मानसून देश के लगभग सभी हिस्सों में पहुंच गया है लेकिन उत्तर भारत में अभी तक उसने दस्तक नहीं दी है. दिल्ली, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों और पश्चिमी राजस्थान में अभी तक मानसून नहीं आया है. आईएमडी ने एक महीने पहले पूर्वानुमान जताया था कि मानसून जून तक इन हिस्सों में पहुंच जाएगा लेकिन उसकी भविष्यवाणी अभी तक सही साबित नहीं हुई है. आईएमडी ने 13 जून को अपने पूर्वानुमान में कहा था कि दक्षिणपश्चिम मानसून 15 जून तक दिल्ली पहुंच जाएगा. हालांकि इसके एक दिन बाद उसने कहा कि इस क्षेत्र में मानसून के आने के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं.

आईएमडी ने एक जुलाई को कहा कि सात जुलाई तक मानसून के पहुंचने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं. बंगाल की खाड़ी से निचले स्तर पर नम पूर्वी हवाओं के आठ जुलाई से पूर्वी भारत के कई हिस्सों तक धीरे-धीरे आने की संभावना है. पांच जुलाई को आईएमडी ने फिर से कहा कि मानसून 10 जुलाई तक पंजाब और उत्तर हरियाणा के साथ उत्तरपश्चिमी भारत में आ सकता है. हालांकि 10 जुलाई तक भी कोई राहत मिलने के संकेत नहीं मिले. केरल में दक्षिणपश्चिम मानसून के पहुंचने के पूर्वानुमान पर आईएमडी ने कहा था कि यह 31 मई तक दक्षिणी राज्य में पहुंचेगा. 30 मई तक आईएमडी ने अपने दैनिक बुलेटिन में कहा कि केरल में 31 मई के आसपास मानसून के पहुंचने की संभावना है. हालांकि उसी दिन दोपहर को उसने अपने बुलेटिन को संशोधित करते हुए कहा कि तीन जून तक मानसून के पहुंचने की उम्मीद है. आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय माहपात्र ने 30 मई को कहा था, ‘‘हम सुबह ही मानसून के पहुंचने में देरी के बारे में बता सकते थे. लेकिन हम केरल में मानसून के पहुंचने के लिए सभी परिभाषित मापदंडों की निगरानी कर रहे थे. अभी तक मापदंड पूरी तरह संतोषजनक नहीं हैं.’

माहपात्र ने कहा कि देश की पूर्वानुमान एजेंसी ने अनुमान जताया कि मानसून दिल्ली समेत उत्तर भारत में 15 जून तक पहुंचेगा जैसे कि मॉडल्स से संकेत मिले थे. लेकिन हमने अगले दिन (14 जून) को इसे बदल दिया जब हमें लगा कि परिस्थितियां मानूसन के आगमन के लिए अनुकूल नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पूर्वानुमान मॉडल्स ने पूर्वी और पश्चिमी हवाओं के संपर्क में एकरूपता नहीं दिखायी. ये दोनों हवा प्रणालियां मानसून के लिए जिम्मेदार होती हैं. उन्होंने कहा कि जब दो हफ्तों तक के लिए पूर्वानुमान की बात आती है तो मॉडल्स की सटीकता अच्छी होती है लेकिन जब चार हफ्तों की बात हो तो यह इतनी अच्छी नहीं होती. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. राजीवन ने कहा कि पूर्वानुमान मॉडल्स ने गलत सिग्नल दिए. राजीवन ने 35 साल तक दक्षिणपश्चिम मानसून का अध्ययन किया. उन्होंने कहा, ‘‘मॉडल्स ने मानसून में विराम और एक हफ्ते पहले इसके फिर से सक्रिय होने जैसी कुछ वृहद घटनाओं को अच्छे तरीके से पकड़ा. लेकिन जब केरल में मानसून या उत्तर भारत में बारिश जैसे स्थानीय पूर्वानुमानों की बात आती है तो इसमें कुछ दिक्कत है.’’ यह भी पढ़ें: मध्य प्रदेश: IAS अधिकारी संतोष वर्मा कोर्ट के आदेशों के साथ फर्जीवाडा करने के मामले में गिरफ्तार

राजीवन ने कहा, ‘‘दिल्ली समेत उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मानसून के आगमन के पूर्वानुमान बहुत जल्दी दिए गए.आईएमडी को पूर्वानुमान जारी नहीं करना चाहिए था. उन्हें कुछ और वक्त तक इंतजार करना चाहिए था.’’ आईएमडी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाला संस्थान है. महापात्र के पूर्ववर्ती के जे रमेश ने कहा कि पश्चिमी और पूर्वी हवाओं के बीच संपर्क की निगरानी मानसून के पूर्वानुमान में सबसे मुश्किल बात है. सामान्य तौर पर दक्षिणपश्चिम मानसून केरल में पहुंचने के बाद महज 14 दिनों में 15 जून तक पश्चिम बंगाल और मध्य भारत के कई हिस्सों तक पहुंचा. जबकि उसे उत्तर भारत तक पहुंचने में करीब तीन सप्ताह का वक्त लगा. केरल में मानसून का आगमन देश में चार महीने के बारिश के मौसम की शुरुआत की आधिकारिक घोषणा होती है.

रमेश ने कहा कि यह पूर्वी और पश्चिमी हवाओं के बीच संपर्क से होता है. इसमें पश्चिमी हवाएं ‘‘बड़े भाई’’ की भूमिका में होती है. पूर्वी हवाएं तभी गति पकड़ती है जब इलाके में कम दबाव होता है जिससे उसे आगे बढ़ने में मदद मिलती है. इससे आम तौर पर हवाओं के ‘‘पीछे और आगे जाने’’ जैसी स्थिति पैदा होती है. यह भी एक वजह है कि उत्तर भारत में मानसून में विराम दिखता है. आईएमडी के पूर्व महानिदेशक अजित त्यागी ने कहा कि मौसम एजेंसी ने अनुमान जताया कि पहली बार में दक्षिणपश्चिम मानसून 15-16 जून तक पूरे देश में पहुंच सकता है. लेकिन फिर से यह कमजोर हुआ और स्पष्ट संकेत मिले कि यह 10 जुलाई से पहले सक्रिय नहीं होगा. अगर कोई 10-15 दिनों के पूर्वानुमान देखे तो यह सही था. उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआती पूर्वानुमान सही नहीं था लेकिन आईएमडी ने समय रहते इसमें बदलाव किया.’’

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 11, 2021 02:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).