इंदौर के जिलाधिकारी मनीष सिंह ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि मामले में जांच चल रही है तथा धोखाधड़ी की यह राशि 100 करोड़ तक होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि मामले में 17 अगस्त को मोहन अग्रवाल, उनके बेटे मोहित व तरुण के साथ अन्य कारोबारी आयुष अग्रवाल और लोकेश अग्रवाल सहित अब तक सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है।
सिंह ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम तथा भादंसं की संबद्ध धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनके खिलाफ महू से काफी दूर स्थानों पर चावल परिवहन संबंधी फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप है।
उन्होंने बताया कि उप मंडल अधिकारी अभिलाष मिश्रा को डोंगरगांव इलाके में मोहन अग्रवाल के गोदाम होने के जानकारी मिलने पर वहां 17 अगस्त को छापा मारा गया। आरोपियों ने पीडीएस के लाभार्थियों को कम चावल, गेंहू, और केरोसिन बेचा और भारी मात्रा में जमाखोरी कर इसे बड़े लाभ के साथ खुले बाजार में बेच दिया।
जिलाधिकारी ने बताया कि छापामार दल ने पीडीएस के चावल के 635 बोरे जब्त किये। इस मामले में पहली प्राथमिकी बड़गोंदा पुलिस थाने में दर्ज की गयी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अमित तोलानी ने बताया कि सभी आरोपी फिलहाल फरार हैं और पुलिस ने प्रत्येक की गिरफ्तारी के लिये पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।
सं दिमो
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