संसद के निचले सदन ‘नेशनल असेंबली’ के लिए हुए चुनाव में वामपंथी, मध्यमार्गी और दक्षिणपंथी दलों में से किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को अपने प्रधानमंत्री गैब्रियल अट्टल से सरकार का दैनिक कामकाज संभालते रहने को कहा। वहीं, पेरिस ओलंपिक शुरू होने में तीन सप्ताह से भी कम समय शेष है।
मैक्रों बुधवार को वाशिंगटन में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होंगे।
रविवार के चुनाव में कोई भी गुट सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत के करीब भी नहीं पहुंच पाया, जिससे यूरोपीय संघ की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के ठप्प हो जाने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि, यूरोप में त्रिशंकु संसद बनना कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन फ्रांस के आधुनिक इतिहास में यह स्थिति अभूतपूर्व है।
सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाले वामपंथी गठबंधन, ‘न्यू पॉपुलर फ्रंट’ का कहना है कि उन्हें नयी सरकार बनानी चाहिए। गठबंधन में शामिल तीन मुख्य पार्टियों - कट्टर वामपंथी फ्रांस अन्बाउड, सोशलिस्ट्स और ग्रीन्स - ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तलाशने के लिए बातचीत शुरू कर दी है।
उनकी बातचीत आंतरिक मतभेदों के कारण जटिल हो गई है। कुछ लोग किसी कट्टर वामपंथी नेता को प्रधानमंत्री बनाने पर जोर दे रहे हैं, जबकि अन्य, जो मध्यमार्गी-वामपंथ के करीब हैं, अधिक स्वीकार्य व्यक्तित्व को प्राथमिकता दे रहे हैं। फ्रांस के प्रधानमंत्री संसद के प्रति जवाबदेह हैं और उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए अपदस्थ किया जा सकता है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY