अहमदाबाद, 16 अगस्त गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता ने लोगों के समक्ष एक वैकल्पिक व्यवस्था प्रस्तुत करने और विभिन्न मुद्दों के बारे में मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाने की कोशिश के तहत बुधवार को एक 'गैर-राजनीतिक' मंच शुरू करने की घोषणा की।
'जन अभियान - बदले गुजरात' नामक इस पहल के तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनकी भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और शक्तियों से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रशिक्षित करने के लिए एक शोध और प्रशिक्षण संस्थान भी खोला जाएगा।
सुरेश मेहता 1995 से लेकर 1996 तक गुजरात के मुख्यमंत्री थे। राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कटु आलोचक मेहता (87) ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में गुजरात सरकार पर खातों का लेखा-जोखा रखने और उनकी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करने से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-150 के अनुसार, खातों का लेखा-जोखा भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा अनुमोदित एक निर्धारित प्रारूप में रखा जाना चाहिए।
मेहता ने दावा किया, ‘‘ हालांकि, सीएजी ने पिछले विधानसभा सत्र में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में कहा था कि गुजरात सरकार अपने खातों के लेखा-जोखा को निर्धारित प्रारूप के अनुसार नहीं रख रही है, जो संविधान के अनुच्छेद-150 का उल्लंघन है। इसके अलावा, सीएजी ने अति-विशिष्ट लोगों के स्वागत के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए खर्च के प्रबंधन के लिए खातों में बनाए गए विभिन्न उप-शीर्षकों को भी गंभीरता से लिया है।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘ गुजरात कई ज्वलंत मुद्दों का सामना कर रहा है, जैसे शिक्षकों की कमी, भ्रष्टाचार, लोगों पर अत्याचार, बच्चों में कुपोषण, मुद्रास्फीति और विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच बढ़ता तनाव। ’’
मेहता ने कहा, ‘‘ लोगों को ऐसे मुद्दों के बारे में जागरूक करने और इस स्थिति में बदलाव लाने के लिए मेरे जैसे चिंतित नागरिक यह पहल शुरू कर रहे हैं। ’’
उन्होंने अपने नेतृत्व वाली गैर-राजनीतिक पहल की रूपरेखा पर चर्चा करने के लिए बृहस्पतिवार को यहां टैगोर हॉल में सभी समान विचारधारा वाले लोगों की एक बैठक बुलाई है।
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