देश की खबरें | तत्कालीन प्रधानमंत्री पर हमले की फोन पर झूठी सूचना देने वाला प्राथमिकी दर्ज होने के 17 साल बाद बरी

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल वर्ष 2005 में स्वतंत्रता दिवस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बम से हमले के खतरे की फोन पर झूठी सूचना देने के आरोपी व्यक्ति को अदालत ने प्राथमिकी दर्ज होने के करीब 17 साल बाद बरी कर दिया है।

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विपुल संदवार भारतीय दंड संहिता की धाराओं 507 (अज्ञात संवाद के माध्यम से आपराधिक धमकी) और 182 (इस मंशा से झूठी सूचना देना कि सरकारी अधिकारी/कर्मचारी दूसरे व्यक्ति को चोट पहुंचाने के लिए अपने अधिकारों का उपयोग करने को बाध्य हो जाए) के तहत आरोपी इस व्यक्ति के खिलाफ सुनवाई कर रहे थे।

मजिस्ट्रेट ने पिछले सप्ताह सुनाए गए अपने फैसले में कहा, ‘‘...अभियोजन पक्ष इस तथ्य को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है कि आरोपी महेश ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 182 और 507 में अपराध किया है और उसे इस मुकदमे में निर्दोष पाया जाता है।’’

उन्होंने कहा कि इस मामले का मुख्य गवाह, पीसीओ/एसटीडी बूथ का मालिक ललित अहमद जिरह के दौरान सही जवाब नहीं दे पा रहा था और बताया कि जिस वक्त फोनकॉल की गयी थी, वह अपने पीसीओ में मौजूद नहीं था।

मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘‘चूंकि अभियोजन का गवाह संख्या दो (अहमद) कॉल किए जाने के वक्त मौजूद नहीं था, उसके द्वारा कही गई कोई भी बात सिर्फ सुनी-सुनाई होगी, ऐसे में यह स्वीकार्य नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे, अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 182 के तहत दंडनीय अपराध को संदेह के परे साबित करने में असफल रहा है।’’

अभियोन पक्ष के अनुसार, महेश ने एक पीसीओ से पुलिस आपात नंबर 100 डायल किया और ‘‘19 जुलाई, 2005 को फर्जी सूचना देते हुए दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री पर बम से हमला होगा।’’

न्यू उस्मानपुर थाने में इसकी प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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