जरुरी जानकारी | फेडर्स इलेक्ट्रिक मामला: सेबी ने पांच लोगों को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया

नयी दिल्ली, 26 दिसंबर पूंजी बाजार नियामक सेबी ने कंपनी के खातों में गड़बड़ी और हेराफेरी के मामले में फेडर्स इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड (एफईईएल) के पांच पूर्व अधिकारियों पर चार करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाने के साथ उन्हें दो साल के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है।

साथ ही, उनपर किसी भी सूचीबद्ध कंपनी या किसी पंजीकृत मध्यस्थ में निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय कर्मी का पद संभालने से दो साल के लिए पाबंदी लगा दी है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने जिन व्यक्तियों पर जुर्माना लगाया है, उसमें मुख्य वित्त अधिकारी सह पूर्णकालिक निदेशक, लेखा समिति के सदस्य तथा एफईईएल के वित्त और लेखा मामलों के प्रभारी अख्तर अजीज सिद्दीकी, पूर्णकालिक निदेशक और वित्त वर्ष 2007-08 से वित्त वर्ष 2016-17 के लिए एफईईएल के वित्तीय ब्योरे पर हस्ताक्षर करने वाले शाम सुंदर धवन शामिल हैं।

इसके अलावा, एफईईएल स्वतंत्र निदेशक और लेखा समिति से संबद्ध बिंदू डोगरा और रितुश्री शर्मा तथा कंपनी के प्रवर्तक से संबद्ध भरत राज पुंज हैं।

सेबी ने अप्रैल, 2012 से अगस्त, 2020 की अवधि के लिए एफईईएल के मामलों की जांच की। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या कंपनी के खातों में हेरफेर किया गया था। या प्रवर्तकों / निदेशकों / प्रमुख प्रबंधकर्मियों ने नियमों का उल्लंघन कर कंपनी के कोष का कोई गलत उपयोग किया था।

सेबी ने अपनी जांच में पाया कि एफईईएल ने एलईईएल इलेक्ट्रिकल्स लि. समेत संबद्ध इकाइयों में बिक्री और खरीद के जरिये अपना कारोबार बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।

हालांकि, एलईईएल ने खरीद और बिक्री से संबंधित जो आंकड़े दिखाये, वे एफईईएल के आंकड़ों से कम थे।

सेबी ने शुक्रवार को पारित अपने आदेश में कहा कि संबद्ध इकाइयों के साथ फर्जी लेनदेन के जरिये धन की हेराफेरी की गयी। हेराफरी का कारण एफईईएल और एलईईएल दोनों का प्रबंधन एक ही समूह के पास था।

नियामक ने व्यक्तिगत रूप से अख्तर अजीज सिद्दीकी पर 1.25 करोड़ रुपये, शाम सुंदर धवन पर 1.2 करोड़ रुपये, भरत राज पुंज पर एक करोड़ रुपये और बिंदू डोगरा और रितुश्री शर्मा पर 35-35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

उन्हें 45 दिनो के भीतर जुर्माना राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

सीबीआई ने जुलाई, 2021 में एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से कथित तौर पर 1,028.94 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के लिए फेडर्स इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

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