नयी दिल्ली, 16 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में भूकंप की तैयारियों से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि हर कोई अपने जीवन की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि इस याचिका में कुछ भी प्रतिकूल नहीं है और यहां तक कि अधिकारी भी स्थिति के प्रति समान रूप से जागरूक हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने छह फरवरी को तुर्किये और सीरिया में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली भूकंपीय क्षेत्र-4 (गंभीर तीव्रता क्षेत्र) के अंतर्गत आती है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, ‘‘वे स्थिति के प्रति समान रूप से जागरूक हैं। याचिका में कुछ भी प्रतिकूल नहीं है। हम सभी को अपनी जान की चिंता है इसलिए उन्हें अपनी रिपोर्ट दायर करने दीजिए।’’
उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार और सप्ताह का समय दिया तथा याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 10 मई की तारीख तय की।
अदालत याचिकाकर्ता अधिवक्ता अर्पित भार्गव की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दावा किया गया है कि दिल्ली में इमारतों की भूकंपीय स्थिरता ठीक नहीं है और बड़े भूकंप की स्थिति में बड़ी संख्या में लोग हताहत हो सकते हैं।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रवि सीकरी ने उच्च न्यायालय के नए भवन के वास्तुकार के साथ हुई बातचीत का उल्लेख किया, जिन्होंने उन्हें सूचित किया कि संरचना भूकंप प्रतिरोधी है, लेकिन पुराने उच्च न्यायालय भवनों में कई खामियां हैं।
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