Fall in Oil-Oilseed Prices: खाद्य तेल-तिलहन के आयात में बढ़ोतरी से कीमतों में गिरावट
सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे सस्ते आयातित तेलों का आयात बढ़ने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को सभी देशी तेल-तिलहनों के भाव औंधे मुंह गिरे, लेकिन उपभोक्ताओं को खुदरा बाजार में इस गिरावट का यथोचित लाभ नहीं मिल रहा है। सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, बिनौला जैसे देशी तेल- तिलहन के अलावा कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन जैसे आयातित तेल के भाव में पर्याप्त गिरावट आई है।
नयी दिल्ली, एक फरवरी सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे सस्ते आयातित तेलों का आयात बढ़ने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को सभी देशी तेल-तिलहनों के भाव औंधे मुंह गिरे, लेकिन उपभोक्ताओं को खुदरा बाजार में इस गिरावट का यथोचित लाभ नहीं मिल रहा है. सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, बिनौला जैसे देशी तेल- तिलहन के अलावा कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन जैसे आयातित तेल के भाव में पर्याप्त गिरावट आई है. यह भी पढ़ें: सोना 1,090 रुपये मजबूत, चांदी में 1,947 रुपये का उछाल
मलेशिया एक्सचेंज में अवकाश है, जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में मामूली गिरावट का रुख है.
बाजार सूत्रों ने कहा कि देश में सूरजमुखी और सोयाबीन तेल का आयात भारी मात्रा में हो रहा है. मौसम खुलने के साथ सरसों के आवक बढ़ेगी और इसके खपने की आशंका से तेल उद्योग परेशान है। पिछले साल आयातित तेलों के दाम महंगा होने के बावजूद सरसों पूरी तरह नहीं खपा तो इस बार आयातित तेल के दाम काफी कम हैं। ऐसे में सरसों के अलावा सोयाबीन, मूंगफली, बिनौला जैसे देशी तेल-तिलहनों का खपना बेहद मुश्किल दिख रहा है। हालत यह है कि देश के सूरजमुखी बीज का दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से पहले से ही कम चल रहा है और अब सरसों के भी दाम एमएसपी से कम होने की आशंका बन रही है.
सूत्रों ने कहा कि दिलचस्प बात यह है कि तेल कीमतों में आई गिरावट के बावजूद ग्राहकों को इस गिरावट का लाभ नहीं मिल रहा। खुदररा तेल कंपनियों द्वारा अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) ऊंचा रखे जाने की वजह से ग्राहकों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। देशी तेल-तिलहन उद्योग, किसानों और उपभोक्ताओं के हित में मौजूदा विषम स्थिति से निकलने का फिलहाल रास्ता यह है कि सूरजमुखी और सोयाबीन तेलों पर आयात शुल्क लगाया जाये तथा तेल उत्पादक कंपनियों को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बारे में सरकारी पोर्टल पर नियमित आधार पर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाये. देशी तेल मिलों के नहीं चलने से खल और डीआयल्ड केक का संकट बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है.
बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 6,140-6,190 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल
मूंगफली - 6,460-6,520 रुपये प्रति क्विंटल
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,440 रुपये प्रति क्विंटल
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,425-2,690 रुपये प्रति टिन
सरसों तेल दादरी- 12,700 रुपये प्रति क्विंटल
सरसों पक्की घानी- 2,030-2,060 रुपये प्रति टिन
सरसों कच्ची घानी- 1,990-2,115 रुपये प्रति टिन
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,500 रुपये प्रति क्विंटल
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,300 रुपये प्रति क्विंटल
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,700 रुपये प्रति क्विंटल
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,300 रुपये प्रति क्विंटल
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,950 रुपये प्रति क्विंटल
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,950 रुपये प्रति क्विंटल
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,050 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल
सोयाबीन दाना - 5,470-5,550 रुपये प्रति क्विंटल
सोयाबीन लूज- 5,210-5,230 रुपये प्रति क्विंटल
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल
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(The above story first appeared on LatestLY on Feb 01, 2023 07:04 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

