देश की खबरें | ईडी ने कर्नाटक के एमयूडीए मामले में छापेमारी की, कांग्रेस शासित राज्य में सियासी पारा चढ़ा

बेंगलुरु, 18 अक्टूबर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) मामले में कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन के सिलसिले में छापेमारी की। इस मामले में ईडी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

ईडी की छापेमारी के बाद कांग्रेस शासित राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है।

सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल के साथ पहुंचे संघीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने मैसूरु स्थित एमयूडीए कार्यालय तथा बेंगलुरु में कुछ अन्य स्थानों पर छापेमारी की।

सूत्रों ने बताया कि ईडी अधिकारियों ने यहां देवराजू के आवास की भी तलाशी ली।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री या उनके परिवार के किसी परिसर पर छापेमारी नहीं की जा रही है।

एमयूडीए सचिव प्रसन्ना कुमार ने मैसूरु में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ईडी की जांच टीम आई है, वे जो भी जानकारी मांगेंगे, हम उपलब्ध कराएंगे।’’

कुमार ने कहा, ‘‘उन्होंने (ईडी अधिकारियों) कहा है कि वे आज और कल यहीं काम करेंगे। कर्मचारियों में से वे जिस किसी से भी मिलना चाहेंगे, हम उन्हें बुलाएंगे और जानकारी देंगे।’’

संघीय एजेंसी ने कुछ सप्ताह पहले लोकायुक्त द्वारा हाल में दर्ज प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए 30 सितंबर को प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दाखिल की थी।

मुख्यमंत्री एमयूडीए द्वारा उनकी पत्नी को 14 भूखंडों के आवंटन में अनियमितता के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कहा कि ईडी की कार्रवाई केवल सूचना जुटाने, मामले से संबंधित दस्तावेज एकत्र करने और उनका सत्यापन करने की कवायद थी।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ईडी जानकारी जुटा सकती है। आप इसे छापेमारी क्यों कह रहे हैं? वे शायद दस्तावेज मांग रहे हैं, जो मुहैया कराए जा सकते हैं।’’

पूर्व सांसद डी. के. सुरेश ने इस कार्रवाई को ‘‘राजनीति से प्रेरित मामले’’ के सिलसिले में ‘‘राजनीति से प्रेरित छापेमारी’’ करार दिया।

शहरी विकास मंत्री सुरेश बी.एस. ने कहा कि एमयूडीए ईडी को उसके द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएगा।

विपक्षी भाजपा और जद (एस) ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी का स्वागत करते हुए आज कहा कि घोटाले को उजागर करने व सच्चाई सामने लाने के लिए ये छापे जरूरी हैं। दोनों दलों के नेताओं ने इस मामले में ईडी की जांच पर सवाल उठाने के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस की आलोचना की और पूछा कि क्या उनकी सरकार के तहत काम करने वाले लोकायुक्त पुलिस द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच संभव है।

एमयूडीए मामले को सरकारी जमीन हड़पने वाला ‘घोटाला’ करार देते हुए केंद्रीय मंत्री और जद (एस) नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘देखते हैं कि ईडी जांच से क्या निकलता है।’’

सिद्धरमैया, उनकी पत्नी बी. एम. पार्वती, उनके साले मल्लिकार्जुन स्वामी और देवराजू (जिनसे स्वामी ने जमीन खरीदकर पार्वती को उपहार में दिया था) तथा अन्य के नाम मैसूर स्थित लोकायुक्त पुलिस द्वारा 27 सितंबर को दर्ज प्राथमिकी में शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक मैसूरु स्थित एमयूडीए कार्यालय में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को तैनात किया गया है, जहां आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।

एमयूडीए भूखंड आवंटन मामले में आरोप है कि एमयूडीए ने सिद्धरमैया की पत्नी की जमीन ‘‘अधिगृहित’’ की थी और इसके बदले उन्हें मैसूरु के एक रिहायशी इलाके (विजयनगर लेआउट तीसरे और चौथे चरण) में 14 प्रतिपूरक भूखंड आवंटित किए थे, जिनका संपत्ति मूल्य उनकी अधिग्रहीत भूमि की तुलना में अधिक था।

एमयूडीए ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे, जहां आवासीय लेआउट विकसित किया गया था।

विवादास्पद योजना के तहत, एमयूडीए ने आवासीय लेआउट बनाने के लिए अधिग्रहण के तहत जमीन देने वालों को उनसे ली गई अविकसित भूमि के बदले में 50 प्रतिशत विकसित भूमि आवंटित की थी।

आरोप है कि मैसूरु तालुका के कसाबा होबली के कसारे गांव के सर्वे नंबर 464 में स्थित 3.16 एकड़ जमीन पर पार्वती का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

विवाद शुरू होने के बाद पार्वती ने घोषणा की थी कि वह आवंटित भूखंड एमयूडीए को वापस कर देंगी।

मुख्यमंत्री ने अपनी या अपने परिवार की, किसी भी तरह के गलत काम में संलिप्तता के आरोप से इनकार किया और कहा कि विपक्ष उनसे ‘‘डरा हुआ’’ है। उन्होंने कहा था कि यह उनके खिलाफ पहला ऐसा ‘‘राजनीतिक मामला’’ है।

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