तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने दावा किया कि नशामुक्त भारत अभियान देश के केवल 270 जिलों में चलाया जा रहा है तथा इस समस्या से निपटने के लिए देशव्यापी आंदोलन की जरूरत है।
शिवसेना के राहुल शिवाले ने कहा कि नशे के लिए खांसी की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है और बाजार में करीब 41 तरह के कफ सीरप हैं जिनमें प्रतिबंधित ड्रग हैं और जिन्हें डॉक्टर के परामर्श के बिना ही बेचा जा रहा है।
भाजपा के जगदंबिका पाल ने कहा कि यह सरकार सत्ता में आने के बाद से ही केवल संसद में नहीं बल्कि हर स्तर पर नशे के खिलाफ अभियान को युद्ध की तरह चला रही है।
उन्होंने कहा कि इस सरकार में पहली बार 30 जुलाई 2022 को देश में चार स्थानों पर लगभग 30 हजार किलो मादक पदार्थो को नष्ट किया गया जो इस बात का सबूत है कि सरकार पूरी सक्रियता से नशामुक्ति अभियान में लगी है।
वहीं, तेलुगू देशम पार्टी के के. राममोहन नायडू ने इस समस्या से निपटने के लिए जिला प्रयासों की जरूरत बताई।
भाजपा के रतन लाल कटारिया ने कहा कि नशे के कारोबार के कारण मानव तस्करी और धन शोधन बढ़ रहा है, जिस पर सरकार कार्रवाई कर रही है।
कांग्रेस के राजमोहन उन्नीथन ने कहा कि मादक पदार्थों की समस्या से सड़कों पर गरीब बच्चों से लेकर फिल्मी सितारे तक प्रभावित हैं। उन्होंने एनडीपीएस कानून में संशोधन की मांग करते हुए कहा कि इसके कुछ प्रावधानों का दुरुपयोग होता है।
भाजपा के जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि पंजाब और जम्मू कश्मीर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में नशीली दवाओं का दुरुपयोग अधिक होता है जिसमें पाकिस्तान का बड़ा हाथ है। उन्होंने दावा किया कि इससे आने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में होता है।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के लावू श्रीकृष्ण ने कहा कि एनडीपीएस कानून का दुरुपयोग करते हुए की जाने वाली दुर्भावनापूर्ण गिरफ्तारियों के मामले में मुआवजे के लिए अलग कानून होने चाहिए।
कांग्रेस के अमर सिंह ने कहा कि पंजाब के पाकिस्तान से लगे होने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थ बनाने वाले, इसकी आपूर्ति करने वाले और विभिन्न कारणों से इसका सेवन करने वाले लोगों के बीच अंतर नहीं किया जाना सबसे बड़ी चूक है।
अन्नाद्रमुक के पी रविन्द्रनाथन ने कहा कि देश में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किये गए हैं तथा इस मामले में सरकार की नीति कतई बर्दाश्त नहीं करने की है।
उन्होंने कहा कि मादक पदार्थो के कुप्रभावों को बारे में बच्चों को स्कूलों में बताया जाना चाहिए ।
वैभव दीपक
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