देश की खबरें | मसौदा ईआईए अधिसूचना ‘खतरनाक’, ‘आपदा’; इसके खिलाफ प्रदर्शन करें : राहुल
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, नौ अगस्त कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को लोगों से अनुरोध किया कि वे नए पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) 2020 मसौदे के खिलाफ प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा कि यह “खतरनाक” है और अगर अधिसूचित होता है तो इसके दीर्घकालिक परिणाम “विनाशकारी” होंगे।

पर्यावरण मंत्रालय ने इस साल मार्च में मसौदा ईआईए अधिसूचना जारी की थी और इस पर जनता से सुझाव आमंत्रित किये गए थे। इसके तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिये पर्यावरण मंजूरी देने के मामले आते हैं।

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हैशटैग ‘विदड्रॉईआईए2020’ (ईआईए2020 वापस लो) के साथ एक फेसबुक पोस्ट में गांधी ने ईआईए 2020 मसौदे के लिये सरकार की निंदा करते हुए कहा कि यह न सिर्फ “अपमानजनक” बल्कि “खतरनाक” भी है।

उन्होंने कहा, “इसमें पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से लंबी लड़ाई के बाद हासिल हुए फायदों को न सिर्फ पलटने की क्षमता है बल्कि इसमें पूरे भारत में पर्यावरण के लिहाज से व्यापक विनाश और बर्बादी फैलाने की भी क्षमता है।”

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गांधी ने कहा, “इस पर विचार कीजिए : ‘स्वच्छ भारत’ का दिखावा करने वाली हमारी सरकार के मुताबिक, अगर यह मसौदा अधिसूचना अमल में आती है तो ‘रणनीतिक तरीके से’ कोयला खनन और अन्य खनिजों के खनन जैसे बेहद प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को पर्यावरण प्रभाव आकलन की जरूरत नहीं रहेगी।”

उन्होंने कहा कि घने जंगलों और पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील अन्य इलाकों से जाने वाले राजमार्गों या रेल लाइनों के लिये भी ईआईए की जरूरत नहीं होगी जिससे बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होगी, जिससे हजारों संरक्षित प्रजातियों के रिहाइश वाले इलाकों में बर्बादी होगी।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन काम होने के बाद भी दिया जा सकता है, यह “भयावह” है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, “इसका मतलब है, किसी परियोजना से पर्यावरण को नुकसान हो जाने के बाद भी, ईआईए किया जा सकता है।”

गांधी ने कहा कि ईआईए,2020 मसौदा एक “तबाही” है और यह उन लोगों की आवाज को बंद करने वाली है जो पर्यावरण को होने वाले इस नुकसान से सीधे प्रभावित होंगे।

गांधी ने कहा, “मैं सभी भारतीयों से इसके खिलाफ खड़े होने और प्रदर्शन करने का अनुरोध करता हूं। हमारे पर्यावरण को बचाने से जुड़ी हर लड़ाई में हमेशा बढ़चढ़कर हिस्सा लेने वाले हमारे युवाओं को निश्चित रूप से इस मुद्दे को उठाना चाहिए और इसे अपना बनाकर लड़ना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “पर्यावरण को बचाने की लड़ाई राजनीतिक और वैचारिक मान्यताओं से इतर है। यह कुछ और नहीं, हाल में कोविड-19 महामारी ने हमे दिखा दिया है कि मानव जीवन कितना क्षणभंगुर है।”

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