देश की खबरें | कोविड-19 के चलते हवाई अड्डों से वन्यजीवों को दूर रखने की कवायद में ढील नहीं दें : डीजीसीए
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नयी दिल्ली, आठ जून भारतीय विमानन नियमाक डीजीसीए ने सोमवार को सभी हवाई अड्डा परिचालकों को सलाह दी कि वे कोरोना वायरस की वजह से विमानों की आवाजाही कम होने के बावजूद हवाई अड्डों से वन्य जीवों को दूर रखने की कवायद में ढील न बरतें।

नागर विमानन निदेशालय (डीजीसीए) ने परिपत्र जारी कर कहा कि कई नियमित गतिविधियां जैसे घास की कटाई, पक्षियों की गतिविधियों की निगरानी के लिए गश्त और उन्हें हटाने के उपाय कर्मचारियों की कम संख्या और विमानों की कम आवाजाही की वजह से सीमित हो सकते हैं।’’

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निदेशालय ने कहा, ‘‘ इसका नतीजा हवाई क्षेत्र में या आसपास पक्षियों या वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हो सकती है जो भोजन करने या आराम करने आते हैं और हो सकता है कि वे वहां पर घोंसला बना लिया हो।’’

उल्लेखनीय है कि भारत में विमान से उड़ान भरने या उतरने के दौरान जानवरों से टकारने की कई घटनाएं सामने आई हैं। ऐसी भी घटनाएं हुई हैं जब उड़ान भरने या उतरने के दौरान पक्षी विमान के इंजन से टकरा गए हों।

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नियामक ने सोमवार को कहा कि नियमों के मुताबिक हवाई अड्डा परिचालक को विमान और वन्य जीवों के टकराने की घटना की संभावना को कम कर विमान परिचालन के खतरे को कम करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।

डीजीसीए ने कहा, ‘‘ इसलिए हवाई अड्डा परिचालकों को सलाह दी जाती है कि वे चिड़ियों/वन्य जीवों को नियंत्रित करने और उनकी निगरानी की प्रक्रिया को जारी रखे। खासतौर पर हवाई यातायात की कमी की वजह से चिड़ियों/वन्य जीवों की बढ़ी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।’’

उल्लेखनीय है कि करीब दो महीने के अंतर के बाद गत महीने की 25 तारीख को घरेलू उड़ानों का परिचालन शुरू किया गया था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय उड़ानें अब भी स्थगित हैं। कोरोना वायरस की महामारी के बावजूद मालवाहक उड़ानों और चिकित्सकीय आधार पर विमानों का परिचालन सामान्य तौर पर हो रहा है।

डीजीसीए ने रेखांकित किया, ‘‘ कई हवाई अड्डे दलदली क्षेत्रों या तालाबों के किनारे हैं जो मुरगाबी सहित हजारों प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करते हैं।’’

नियामक ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ये पक्षी विमानों को खतरा उत्पन्न करते हैं। इसलिए सीमित विमानन गतिविधियों के मौजूदा माहौल में चिड़ियों/ वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।’’

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