चेन्नई, 28 सितंबर द्रमुक और उसके सहयोगी दलों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ सोमवार को तमिलनाडु भर में सड़कों पर प्रदर्शन किया। पार्टी प्रमुख एम के स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी अदालत में केंद्र सरकार के विवादास्पद कदम को चुनौती देने के लिए तैयार है।
राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के तहत कांचीपुरम जिले के एक गांव में एक प्रदर्शन को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानून किसानों को उनकी जमीन से वंचित कर देंगे।
प्रदर्शनों के दौरान, ‘‘कृषि कानूनों को वापस लें’’, ‘‘हम तब तक आराम नहीं करेंगे जब तक किसानों के हितों की रक्षा नहीं की जाती’’, ‘‘किसानों को धोखा दिया गया’’, ‘‘कृषि कानून से जमाखोरी बढ़ेगी’’ जैसे नारे लगाए गए।
द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन, जिसमें कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं, ने पिछले सोमवार को हालिया संसद सत्र में पारित विधेयकों के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन करने का फैसला किया।
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उन्होंने कहा, ‘‘केरल कानूनों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने के लिए तैयार है और तमिलनाडु सरकार को भी इस पर अमल करना चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है, तो "हम (द्रमुक) एक विपक्षी दल के रूप में किसानों और जनता की ओर से अदालत जाने के लिए तैयार हैं।’’
द्रमुख प्रमुख ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कहा करते हैं कि वह एक गरीब मां के बेटे हैं और गरीब मां का यह बेटा अब बड़ी संख्या में भारतीयों को गरीब बना रहा है’’।
एमडीएमके प्रमुख वाइको, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के एस अलागिरी, द्रमुक नेता टी आर बालू, दयानिधि मारन समेत कई लोगों ने अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।
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