चंडीगढ़, आठ दिसंबर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह अपने शिक्षा और वित्त विभागों के प्रमुखों का वेतन तब तक के लिए रोक दे, जब तक वे एक दशक पहले अदालत का रुख करने वाले शिक्षकों के एक समूह को "सेवा लाभ" नहीं देते।
वकील अलका चतरथ ने शुक्रवार को बताया कि शिक्षकों ने उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर करके सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में उनकी पिछली सेवा से लाभ देने का अनुरोध किया था जब उनके वेतन की गणना सरकारी विद्यालयों से जुड़ने के समय के आधार पर की गयी थी।
वर्ष 2018 में उनके पक्ष में अदालत के आदेश के बावजूद याचिकाकर्ताओं को लाभ नहीं दिया गया।
न्यायमूर्ति राजबीर सहरावत ने आदेश दिया, "यह अदालत प्रतिवादियों की इस तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं कर सकती है और ऐसे अनुचित कारणों से अदालत का समय बर्बाद नहीं किया जा सकता। इसलिए, मामले में कठोर निर्देश अनिवार्य हो गए हैं।’’
आदेश में कहा गया है कि पंजाब के शिक्षा और वित्त विभागों में प्रमुख सचिवों को वेतन का भुगतान ‘‘आदेश के अनुपालन तक रोका जाए।’’
अदालत ने यह आदेश अनिल कुमार और अन्य द्वारा दायर अदालत की अवमानना याचिका पर सुनवायी करते हुए पारित किया।
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