देश की खबरें | 'समय-पूर्व रिहाई के लिए एसआरबी की सिफारिश के बावजूद सजा में छूट की अर्जी खारिज करना अवांछनीय'

नयी दिल्ली, 22 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने फिरौती के लिए अपहरण के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक दोषी की सजा कम करने संबंधी याचिका खारिज करने की ओडिशा सरकार की कार्रवाई को शुक्रवार को ‘बेहद अवांछनीय स्थिति’ करार दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) के समय-पूर्व रिहाई के फैसले के बावजूद राज्य सरकार ने बिना कोई कारण बताए सजा में छूट संबंधी याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा, ‘‘हमने राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (तुषार मेहता) से कहा है कि यह बेहद अवांछनीय स्थिति है। यह इस मुद्दे पर निर्धारित कानून की समीक्षा नहीं है। कुछ विशेष कारण रहे होंगे कि एसआरबी की अनुशंसा के बावजूद इसे स्वीकार नहीं किया गया।’’

पीठ ने कहा कि इस मुद्दे की अधिकारियों द्वारा फिर से जांच की गई और दोषी को सजा में छूट दी गई।

मेहता ने अदालत को बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को सलाह दी है कि ऐसे मामलों के लिए एक उचित प्रक्रिया या मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) होनी चाहिए।

पीठ ने निर्देश दिया कि एसओपी को अधिकतम चार सप्ताह की अवधि के भीतर लागू किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

शीर्ष अदालत दोषी राजन मिश्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे सितंबर 2007 में फिरौती के लिए अपहरण के आरोप में एक निचली अदालत ने दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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