देश की खबरें | गोवा में दंत चिकित्सकों ने विरोध जताने के लिए नड्डा के साथ संवाद के दौरान काली पट्टी बांधी

पणजी, 25 नवंबर गोवा में निजी दंत चिकित्सकों के एक समूह ने राज्य सरकार द्वारा जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन शुल्क बढ़ाए जाने को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा के साथ यहां संवाद के दौरान हाथों में काली पट्टी बांध रखी थी।

नड्डा ने बुधवार शाम को विभिन्न शाखाओं के चिकित्सा पेशेवरों के साथ बातचीत की थी। इसी दौरान दंत चिकित्सकों ने अपना विरोध दर्ज कराया। इस संवाद का आयोजन भाजपा की राज्य इकाई के चिकित्सकीय प्रकोष्ठ ने किया था। जिन दंत चिकित्सकों ने विरोध दर्ज कराया, वे भारतीय दंत चिकित्सा संघ (आईडीए) से संबद्ध हैं।

संवाद के दौरान मौजूद रहे मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बाद में कहा कि दंत चिकित्सकों द्वारा भाजपा अध्यक्ष के समक्ष विरोध दर्ज कराने की घटना ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ थी।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नड्डा के साथ सवाल-जवाब सत्र के दौरान चिकित्सकों ने गोवा सरकार द्वारा जैव चिकित्सा अपशिष्ट निपटान शुल्क बढ़ाए जाने पर आपत्ति जताई।

आईडीए के सदस्य डॉ. अनिल डी सिल्वा ने विरोध के बाद संवाददाताओं से कहा कि दंत चिकित्सकों को ‘‘अतार्किक तरीके से उन चिकित्सकों की श्रेणी में रखा गया जो भारी जैव चिकित्सा कचरा पैदा करते हैं।’’

उन्होंने कहा कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट एकत्र करने का काम दिल्ली की एक निजी कंपनी को सौंपा गया है और कंपनी ने दंत चिकित्सकों को बड़ी मात्रा में इस प्रकार के अपशिष्ट पैदा करने वालों की श्रेणी में रखा है, जिसके कारण शुल्क बढ़ गया है।

मुख्यमंत्री सावंत ने संवाददाताओं से कहा कि दंत चिकित्सकों ने अतीत में उनसे मुलाकात की थी और उनकी मांग पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकार के कार्यक्रम में प्रदर्शन करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि यह राज्य का मामला है और मैंने उनके प्रश्नों का उचित तरीके से उत्तर दिया था।’’

सावंत ने कहा कि कार्यक्रम में विरोध जताने वाले कुछ दंत चिकित्सक ‘‘राजनीति से प्रेरित थे।’’

घटना पर बीती रात मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक बयान जारी किया गया जिसमे कहा गया ‘‘फिदाल्गो होटल में चिकित्सकों के साथ आज संवाद के दौरान हुई घटना के बारे में बताया जाता है कि मुख्यमंत्री ने, अपने समक्ष उठाए गए इस मुद्दे के सकारात्मक तरीके से समाधान का आश्वासन दिया था। आश्वासन दिए जाने के बावजूद इस तरह से प्रदर्शन किए जाने का कारण दुर्भाग्यवश ज्ञात नहीं है।’’

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