देश की खबरें | भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय महत्व को डेनमार्क स्वीकार करता है : विदेश मंत्री लार्स लोकी रासमुसेन

नयी दिल्ली, 28 फरवरी डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोकी रासमुसेन ने मंगलवार को कहा कि उनका देश खासतौर पर वैश्विक जलवायु और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय महत्व को स्वीकार करता है।

उन्होंने कहा कि डेनमार्क के कारोबारी वाणिज्यिक अवसर तलाशने और भारत के हरित परिवर्तन का समर्थन करने के लिए समाधान मुहैया करने को उत्सुक हैं।

भारत की यात्रा पर आये डेनमार्क के शहजादे फ्रेडरिक आंद्रे हेनरिक क्रिश्चियन ने कहा कि वह हरित रणनीतिक साझेदारी के लिए दोनों देशों के साथ मिल कर काम करने की प्रतिबद्धता जताने से खुश हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम एक हरित और सतत भविष्य की वैश्विक कोशिश का समर्थन कर सकते हैं। हरित रणनीतिक साझेदारी इस बात का गवाह है कि परस्पर लाभकारी और साथ मिल कर काम करने से क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।’’

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) द्वारा आयोजित एक बैठक को संबोधित करते हुए डेनमार्क के शहजादे ने कहा कि उनके देश की कंपनियां भारत को खासतौर पर ऊर्जा और जल जैसे क्षेत्रों में अपने जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जरूरी समाधान मुहैया कर सकती है।

भारत के साथ साझेदारी के लिए डेनमार्क सरकार के पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहने का आश्वासन देते हुए रासमुसेन ने कहा, ‘‘हम भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय महत्व को स्वीकार करते हैं। हम विश्व के अंतरराष्ट्रीय जलवायु एवं सतत (विकास) लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भारत के महत्व को स्वीकार करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत के लोगों की जरूरत को स्वीकार करते हैं और यह हमारा लक्ष्य है कि डेनमार्क का कौशल और हरित प्रौद्योगिकियां जरूरमंदों की मदद करे।’’

उन्होंने रेखांकित किया कि भारत के लोगों और अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाने के लिए इसके (भारत के) विकास एवं हरित परिवर्तन में सहायता करने के वास्ते डेनमार्क तैयार है।

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत-डेनमार्क द्विपक्षीय सहयोग हरित एवं सतत विकास मुहैया करने पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत और डेनमार्क ने ऊर्जा एवं जलवायु पर बहुत महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किये हैं, जो पेरिस (जलवायु) समझौते के महत्वाकांक्षी क्रियान्वयन में योगदान देगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देश साथ मिल कर विश्व को यह दिखा सकते हैं कि जलवायु एवं सतत ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा कर पाना संभव है।’’

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