नयी दिल्ली, छह अप्रैल राज्यसभा में बुधवार को एक सदस्य ने निजी चिकित्सा कॉलेजों की फीस विनियमन करने का मुद्दा उठाया और साथ ही देश में सरकारी चिकित्सा कॉलेजों की संख्या भी बढ़ाने की मांग की।
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि देश के सभी चिकित्सा संस्थानों में से सिर्फ 53 प्रतिशत कॉलेज ही सरकारी हैं जबकि शेष 47 प्रतिशत निजी हैं और इनकी संख्या में पिछले कुछ सालों से बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन में युद्ध ने एक बार फिर भारत में मेडिकल शिक्षा की स्थिति पर सबका ध्यान केंद्रित किया है।
उन्होंने कहा कि देश के मौजूदा चिकित्सा संस्थानों में आज करीब 92 हजार मेडिकल सीट हैं जो अपर्याप्त है।
रमेश ने कहा कि सरकार वर्ष 2017 में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक लेकर आई थी, जिसमें प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग निजी चिकित्सा संस्थानों की 40 प्रतिशत सीटों की फीस तय करेगा।
उन्होंने कहा कि बाद में संसद की स्थायी समिति ने इसे कम से कम 50 प्रतिशत किए जाने की सिफारिश की थी लेकिन 2019 में पारित कानून में इसे 50 प्रतिशत कर दिया गया।
उन्होंने निजी चिकित्सा संस्थानों द्वारा शेष 50 प्रतिशत सीटों की फीस मनमाने तरीके से वसूले जाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘हमें सरकारी चिकित्सा कॉलेजों की संख्या बढ़ानी चाहिए और साथ ही सभी निजी चिकित्सा संस्थानों की फीस विनियमित करनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि देश में पेशवर चिकित्सकों की बहुत कमी है।
शून्यकाल में ही भारतीय जनता पार्टी के अजय प्रताप सिंह ने कहा कि वर्ष 2015 में सरकार ने रामायण सर्किट के विकास की घोषणा की थी।
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