नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर तिहाड़ जेल अधिकारियों ने दिल्ली की एक अदालत को बताया कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों के मामले में गैरकानूनी गतिविधि (निरोधक) अधिनियम के तहत गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा खातून कथित तौर पर “आक्रामक” है और उसने कई मौकों पर जेल कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत में अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अदालत में खातून की उस याचिका पर सुनवाई हो रही थी जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि जेल कर्मियों द्वारा उनपर सांप्रदायिक टिप्पणी की जाती है और मानसिक उत्पीड़न किया जाता है।
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तिहाड़ जेल अधीक्षक ने याचिका पर 15 अक्टूबर को दिये गए जवाब में कहा कि कर्मचारियों से कथित तौर पर दुर्व्यवहार के लिये उसे पहले भी सुधारात्मक दंड दिया गया था जिससे वह अपने व्यवहार को बदले।
जवाब में कहा गया, “महिला कैदी (खातून) जेलकर्मियों पर बल का इस्तेमाल करने की कोशिश करती है और जेल में अव्यवस्था फैलाती है, उसका व्यवहार भी आक्रामक और मुश्किल पैदा करने वाला है। कर्मचारियों को भी निर्देश दिये गए हैं कि वे विनम्र व्यवहार करें और कैदियों से बहस न करें। रिकॉर्ड के मुताबिक याचिकाकर्ता को व्यवहार में बदलाव के लिये सुधारात्मक दंड दिये गए।”
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अधीक्षक ने बताया कि खातून द्वारा की गई शिकायतों और आगे किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिये उस कर्मी की ड्यूटी वार्ड से बदल दी गई है।
जवाब में कहा गया, “कर्मियों को निर्देश दिये गए हैं कि कैदियों से विनम्रतापूर्वक व्यवहार करें और उनके साथ बहस नही करें। इस मामले को सुलझाने के लिये फिलहाल स्टाफ की ड्यूटी भी बदल दी गई है।”
इसमें कहा गया कि 15 अक्टूबर तक केंद्रीय कारागार संख्या छह में जहां खातून को रखा गया है वहां 48 अन्य मुस्लिम महिलाएं भी हैं और उनमें से किसी ने भी इस तरह की शिकायत नहीं की।
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