नयी दिल्ली, 16 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत गिरफ्तार जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद जमानत के लिये निचली अदालत का रुख करने को कहा है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने बुधवार को निचली अदालत को भी निर्देश दिया कि यदि जमानत याचिका दायर की जाती है, तो वह इस पर विचार करे और इसका निस्तारण तेजी से तथा याचिका दायर होने के दो हफ्तों के अंदर करे।
उच्च न्यायालय ने निचली अदालत से यह भी कहा कि वह जमानत की नयी याचिका पर विचार करे। अदालत ने इससे पहले तन्हा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
उच्च न्यायालय का यह आदेश दिल्ली पुलिस द्वारा उसे यह सूचित करने के बाद आया है कि वह मामले में 17 जुलाई को या इससे पहले आरोपपत्र दाखिल करने जा रही है।
हालांकि, बाद में आज ही दिन में पुलिस ने मामले में निचली अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया।
उच्च न्यायालय ने इससे पहले कहा था कि मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद आरोपी निचली अदालत में जमानत याचिका दायर कर सकता है।
तन्हा (24) को 19 मई को गिरफ्तार किया गया था और 27 मई से न्यायिक हिरासत में है। उसने मामले में अपनी जमानत याचिका खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।
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