नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में गत फरवरी में हुए सांप्रदायिक दंगे के दौरान हैड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में सोमवार को एक आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि आरोपी शादाब अहमद की कॉल डिटेल दर्शाती है कि वह इस मामले में सह-आरोपियों सुलेमान सिद्दीकी तथा सह-अभियुक्त राविश के साथ लगातार संपर्क में था।
अदालत ने कहा, ‘‘आवेदक के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। आवेदक (अहमद) दिल्ली का निवासी नहीं है और ऐसे में उसके फरार होने का जोखिम रहेगा।''
अदालत ने कहा कि अहमद की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को देखने पर एक अंचभित करने वाली बात सामने आई कि हैड कांस्टेबल की हत्या के समय आरोपी घटना वाले स्थान के आसपास ही मौजूद था और उसके वकील ने उसे तीन बार कॉल किया था, जो कि इस मामले में उसकी पैरवी कर रहे थे।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा, '' यह एक इत्तेफाक हो सकता है लेकिन बिना मतलब का नहीं। मैं इसे लेकर टिप्पणी करने से बचना चाहूंगा कि क्या नैतिक रूप से संबंधित वकील के लिए यह उपयुक्त होगा अथवा नहीं कि वह इस मामले में आवेदक (अहमद) का पक्ष रखें।''
उन्होंने आगे कहा कि आरोपी की 31 जनवरी, 2020 से लेकर 24 फरवरी, 2020 की सीडीआर से खुलासा हाता है कि वह इस हत्या के मामले के कुछ सह-अभियुक्तों के संपर्क में था।
अहमद को भी दंगों की साजिश रचने के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया है, जिसकी जांच दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई कर रही है।
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