नयी दिल्ली, 24 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू)-भारत द्वारा अमेरिकी ऑनलाइन भुगतान मंच पेपाल पर लगाया गया 96 लाख रुपये का जुर्माना सोमवार को निरस्त कर दिया।
धन शोधन के खिलाफ कानून के तहत जानकारी देने से जुड़े नियम व शर्तों का कथित तौर पर अनुपालन नहीं करने को लेकर यह जुर्माना लगाया गया था।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने व्यवस्था दी कि पेपाल धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत भुगतान प्रणाली संचालक माने जाने योग्य है तथा उसे इस कानून के तहत जानकारी देने से जुड़े नियम व शर्तों का पालन करना होगा।
अदालत ने 174 पन्नों के अपने आदेश में पेपाल पर लगा जुर्माना निरस्त कर दिया और कहा कि यह ‘स्पष्ट रूप अनुचित’ था क्योंकि पेपाल को यह विश्वास था कि उसका परिचालन पीएमएलए के दायरे में नहीं आता है।
अदालत का यह आदेश पेपाल की उस याचिका पर आया है, जिसमें उसने पीएमएलए के कथित उल्लंघन को लेकर उसपर एफआईयू द्वारा 96 लाख रुपया जुर्माना लगाये जाने को चुनौती दी थी।
एफआईयू ने 17 दिसंबर, 2020 को कंपनी को 45 दिनों के अंदर जुर्माने का भुगतान करने का निर्देश दिया था।
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