नयी दिल्ली, 19 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक दवा कंपनी की उन याचिकाओं पर केंद्र से जवाब तलब किया है, जिनमें मानव इस्तेमाल के लिए ‘निश्चित खुराक संयोजन’ (एफडीसी) वाली कुछ दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है।
एफडीसी दवाएं वे होती हैं, जिनमें एक निश्चित अनुपात में दो या दो से अधिक ‘सक्रिय दवा सामग्री’ (एपीआई) का संयोजन होता है।
अदालत ने सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की तीन याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि पहले से वितरण प्रक्रिया में शामिल याचिकाकर्ताओं की एफडीसी दवाएं वापस नहीं ली जाएंगी और उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा ग्लेनकॉफ़ क्यू, एस्कोडेक्स डीएक्स सिरप, एस्कोरिल-सी सिरप और अन्य ब्रांड नाम के तहत एफडीसी दवाओं का उत्पादन किया जा रहा था।
सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर इस साल दो जून को 14 एफडीसी दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करते हुए कहा था कि इन दवाओं का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है और इनसे लोगों को 'जोखिम' हो सकता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सुनवाई की अगली तारीख तीन जुलाई तक दवाओं का कोई नया उत्पादन नहीं होगा और याचिकाकर्ता को इन दवाओं के अपने स्टॉक के साथ-साथ वितरण प्रक्रिया में शामिल संबंधित दवाओं का ब्योरा दर्ज करने के लिए कहा।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की अवकाशकालीन खंडपीठ ने पिछले सप्ताह आदेश दिया, ‘‘यह निर्देश दिया जाता है कि जो दवाएं पहले से ही वितरण प्रक्रिया में हैं, उन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। हालांकि, सुनवाई की अगली तारीख तक दवा का कोई नया उत्पादन नहीं होगा। इसके अलावा, जो एफडीसी दवाएं वितरण प्रक्रिया का हिस्सा हैं, उनके लिए याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।’’
अदालत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि उसने 2018 में ‘कुछ ऐसी ही परिस्थितियों’ के अंतर्गत एक अन्य दवा कंपनी को भी अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था।
इसने केंद्र सरकार के वकील को याचिकाओं का जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह पिछले 30 साल से एफडीसी दवाओं का उत्पादन कर रहा है।
विशेषज्ञ समिति ने कहा था कि "इन एफडीसी दवाओं का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है और एफडीसी में मानव के लिए जोखिम शामिल हो सकता है। इसलिए व्यापक जनहित में, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत इन दवाओं के निर्माण, बिक्री या वितरण पर रोक लगाना आवश्यक है।"
सरकार ने 2016 में 344 एफडीसी दवाओं के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर उस वक्त प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी, जब उच्चतम न्यायालय के इशारे पर गठित एक विशेषज्ञ समिति ने कहा था कि इन दवाओं को वैज्ञानिक ‘डेटा’ के बिना रोगियों को बेचा जा रहा था।
इस आदेश को निर्माताओं ने अदालत में चुनौती दी थी।
हाल में प्रतिबंधित 14 एफडीसी दवाएं उन 344 दवाओं में शामिल हैं।
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