देश की खबरें | मेहुल चोकसी की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र, नेटफिल्कस से जवाब मांगा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीएनबी घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी की ‘बैड ब्वॉय बिलियनेयर्स’ डॉक्यू सीरीज की प्री स्क्रीनिंग के अनुरोध संबंधी याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर केंद्र और ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स से सोमवार को जवाब मांगा।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने केंद्र और नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी किया और चोकसी की अपील पर 23 सितंबर तक उनका जवाब मांगा है।

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चोकसी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता विजय अग्रवाल ने कहा कि वह सिर्फ यह अनुरोध कर रहे हैं कि मामले को फिर से एकल न्यायाधीश की पीठ के पास भेज दिया जाए जिन्होंने श्रृंखला की पूर्व स्क्रीनिंग संबंधी याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताकर खारिज किया था।

एकल न्यायाधीश की पीठ ने 28 अगस्त के फैसले में चोकसी को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि निजी अधिकार लागू कराने संबंधी रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

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उच्च न्यायालय ने कहा था कि चोकसी की समस्या का निदान दीवानी वाद से होगा और अदालत ने यह मामला दीवानी वाद में उठाने की छूट दी थी।

गीतांजलि जेम्स का प्रवर्तक चोकसी और उनका भांजा नीरव मोदी 13,500 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) फर्जीवाड़ा मामले में आरोपी हैं।

चोकसी ने पिछले साल देश छोड़ दिया था और एंटीगुआ और बारबूडा की नागरिकता ले ली थी।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सोमवार के हुई सुनवाई के दौरान अग्रवाल ने दलील दी कि इस श्रृंखला में चोकसी के बारे में दो मिनट की फुटेज है, जिसमें उन्हें गलत तरीके से पेश किया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसा करने से भारत में उनके खिलाफ जारी विभिन्न कार्यवाही प्रभावित हो सकती हैं।

नेटफ्लिक्स ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि पूर्व में उच्च न्यायालय ने कहा था कि ओटीटी प्लेटफॉर्म अथवा इंटरनेट वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को विनियमित नहीं किया जा सकता और वादी को केवल दीवानी वाद दायर करने का विकल्प दिया था।

नेटफ्लिक्स ने प्री-स्क्रीनिंग के अनुरोध का विरोध करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करार दिया।

जब पीठ ने सवाल किया कि क्या डॉक्यू सीरीज पर रोक लगा दी गई है तो नेटफ्लिक्स ने कहा कि बी रामालिंगा राजू और सुब्रत राय सहारा ने देश के अन्य हिस्सों में अदालत से इस पर रोक प्राप्त की है और इसके खिलाफ अपील दायर करने की तैयारी की जा रही है।

इस श्रृंखला में राजू और सहारा को लेकर भी जिक्र किया गया है।

सहारा ने बिहार के अररिया की एक स्थानीय अदालत से आदेश प्राप्त किया है, जिसमें नेटफ्लिकस को सहारा का नाम उपयोग करने से रोका गया है।

इसी तरह, सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज लिमिटेड में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में आरोपी राजू की याचिका पर आंध्र प्रदेश की एक दीवानी अदालत ने श्रृंखला के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। इस डॉक्यू सीरीज को भारत में दो सितंबर को रिलीज होना था जिसका प्रचार नेटफ्लिक्स ने इस तरह से किया है, “यह खोजी डॉक्यू सीरीज भारत के सबसे बदनाम कारोबारियों को बनाने और अंतत: गिराने वाले लालच, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार को दिखाती है।”

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