नयी दिल्ली, पांच जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने आप सरकार को एक हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि राजधानी की जिला अदालतों में कितने समय के भीतर इंटरनेट सेवाओं की क्षमता में सुधार हो जायेगा ताकि अदालत के रिकार्ड का कम्प्यूटरीकरण और वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से मामलों की सुनवाई सुनिश्चित हो सके।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। पीठ ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर पिछले ढाई साल में कोई ठोस कार्रवाई करने में विफल रहने के बारे में दिल्ली सरकार से स्पष्टीकरण भी मांगा है।
अदालत कोरोना महामारी की वजह से इस समय लगे प्रतिबंधों के आलोक में अदालतों, विशेष रूप से कुटुम्ब अदालतों के कामकाज का दायरा बढ़ाने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
इस याचिका में कोविड-19 की वजह से लगे प्रतिबंधों के मद्देनजर सभी कुटुम्ब अदालतों को पीठासीन न्यायाधीश या फिर आयुक्त की मदद से वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से साक्ष्य दर्ज करने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है।
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इससे पहले, अदालत ने कुटुम्ब अदालतों के कामकाज का विस्तार करने के बारे में अपने रजिस्ट्रार और विभिन्न बार एसोसिएशनों से इस मुद्दे पर सुझाव मांगे थे।
इस मामले में बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रार रितेश सिंह और संयुक्त रजिस्ट्रार मनीष अग्रवाल ने पीठ से कहा कि जिला अदालतों में उपलब्ध कराये गये सीमित बैंडविथ से ही वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये मामलों की सुनवाई हो रही है।
उन्होंने बताया कि जिला और सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय), तीस हजारी और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दिल्ली सरकार के विधि एवं न्यायिक सचिव को बार बार पत्र लिखकर प्रत्येक जिला अदालत में मौजूदा लाइनों को 34 एमबीपीएस से बढ़ाकर एक जीबीपीएस किए जाने का कहने के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।
अनूप
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