नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को आतंकी संगठन आईएसआईएस के 13 सदस्यों को अलग-अलग सजाएं दीं। ये सभी भारत में अपना आधार बनाने एवं आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए सोशल मीडिया के जरिए मुस्लिम युवाओं की भर्ती करने की आपराधिक साजिश रचने के दोषी पाए गए।
विशेष न्यायाधीश प्रवीन सिंह ने नफीस खान को 10 वर्ष जेल की सजा सुनाई जबकि तीन दोषियों को सात वर्ष की कैद और एक व्यक्ति को छह साल कैद की सजा दी गई।
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दोषियों के वकील कौसर खान ने कहा कि अदालत ने अन्य आठ दोषियों को पांच साल कैद की सजा सुनाई।
उन्होंने कहा कि अबु अनस, मुफ्ती अब्दुल समी कासमी और मुदब्बिर मुश्ताक शेख को सात साल जबकि अमजद खान को छह साल कैद की सजा सुनाई गई।
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वहीं, अब्दुल्ला खान, नजमुल हुदा, मोहम्मद अफजल, सुहैल अहमद, मोहम्मद अलीम, मोइनुद्दीन खान, आसिफ अली और सैय्यद मुजाहिद को पांच साल जेल की सजा सुनाई गई।
वहीं, दोषी ठहराए जाने के दौरान अभियुक्तों ने अदालत के समक्ष कहा था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर उन्हें पछतावा था और वे भविष्य में इस तरह की किसी भी गतिविधि एवं कृत्य में शामिल नहीं होंगे।
वकील खान ने अदालत के समक्ष कहा था कि अभियुक्त समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने नौ दिसंबर 2015 को आईपीसी की आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम की संबंधित धाराओं के अंतर्गत एक मुकदमा दर्ज किया था।
एनआईए के मुताबिक, आईएसआईएस द्वारा भारत में अपना आधार बनाने एवं आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए सोशल मीडिया के जरिए मुस्लिम युवाओं की भर्ती करने की आपराधिक साजिश रचने के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
अभियुक्तों ने इस कृत्य को अंजाम देने के लिए जुनुद-उल-खलीफा-फिल-हिंद नामक संगठन बनाया था। एनआईए ने अभियुक्तों के खिलाफ 2016-2017 में आरोपपत्र दाखिल किए थे।
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