नयी दिल्ली, सात जुलाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक इमारतों को सोमवार को जनता के लिए पुनः खोल दिया गया लेकिन पहले दिन आगंतुकों की संख्या बहुत कम रही।
सूत्रों के अनुसार यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित कुतुब मीनार घूमने सबसे ज्यादा सौ लोग आए।
एएसआई के अधिकारियों के मुताबिक बारहवीं सदी की इस मीनार को देखने के लिए आमतौर पर हर रोज आठ से दस हजार लोग आते हैं।
सूत्रों ने बताया कि अन्य इमारतों में हुमायूं के मकबरे पर 70-80 लोग आए। उन्होंने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पुराना किला देखने 20-22, सफदरजंग मकबरे पर आठ और जंतर मंतर पर लगभग 12 लोग आए।
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कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा और दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित अन्य इमारतों को कोविड-19 के संकट के कारण तीन महीने से अधिक समय तक बंद रखने बाद सोमवार को पुनः खोला गया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आगंतुकों के लिए मास्क लगाना अनिवार्य है और बिना मास्क के किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं है।
आमतौर पर प्रत्येक सोमवार को बंद रहने वाले लाल किले को बंद रखा गया और मंगलवार को पुनः खोला गया।
अधिकारी ने कहा, “इमारतों को पुनः खोले जाने के बाद आगंतुक दो पाली में से किसी एक में टिकट बुक करा सकते हैं। उन्हें या तो सुबह से शुरू होकर मध्याह्न 12 बजे के बीच का टिकट लेना होगा या 12 बजे से शाम छह बजे तक के बीच का टिकट लेना होगा। प्रत्येक पाली में अधिकतम 1500 आगंतुकों को जाने की अनुमति है।”
दिल्ली की एएसआई संरक्षित इमारतों को संस्कृति मंत्रालय के निर्देशों के आधार पर पुनः खोला गया है। अधिकारियों ने कहा कि सामाजिक दूरी और संक्रमण मुक्ति समेत मंत्रालय द्वारा निर्देशित सभी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और नियमों का ध्यान रखा जा रहा है।
नियमों के अनुसार प्रवेश के लिए ई-टिकट ही जारी किए जा रहे हैं और इमारतों के परिसर के अंदर खाना पीना या सामूहिक फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है।
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