भारतीय शेयर बाजार में आज भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1350 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। इस बीच, कमोडिटी बाजार में भी उथल-पुथल मची रही, जहां सोने की कीमतों में तेज गिरावट आई और चांदी में भी भारी उठापटक दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और कुछ घरेलू कारकों ने इस गिरावट में अहम भूमिका निभाई है।
शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
आज की गिरावट के पीछे कई कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी वैश्विक बाजारों पर दबाव डाल रही हैं, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी देखा जा रहा है। घरेलू मोर्चे पर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार बिकवाली जारी है, जिससे बाजार में तरलता कम हुई है।
सोने और चांदी पर असर
शेयर बाजार में गिरावट का असर कमोडिटी बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। सुरक्षित निवेश के तौर पर देखे जाने वाले सोने की कीमतों में भी आज तेज गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर, जब शेयर बाजार गिरता है, तो निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे उसकी कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि, आज की स्थिति थोड़ी अलग रही, जहां डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण सोने पर भी दबाव बना। चांदी की कीमतों में भी भारी उठापटक देखने को मिली, जो निवेशकों के बीच अनिश्चितता को दर्शाता है।
आगे की राह और निवेशकों के लिए सलाह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है और बाजार जल्द ही वापसी कर सकता है, जबकि अन्य का मानना है कि निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले गहन शोध करें और वित्तीय सलाहकारों से परामर्श लें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए, गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश का यह एक अवसर हो सकता है, लेकिन छोटी अवधि के निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।













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