देश की खबरें | राजीव गांधी मामले के सात दोषियों की रिहाई पर निर्णय करें, पार्टियों ने तमिलनाडु के राज्यपाल से कहा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

चेन्नई, तीन नवम्बर तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल द्रमुक और पीएमके ने मंगलवार को तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से राजीव गांधी हत्याकांड के सात दोषियों की रिहाई के बारे में जल्द फैसला करने का आग्रह किया।

इन दलों की प्रतिक्रिया राजीव गांधी हत्याकांड के एक मुजरिम ए जी पेरारिवलन की सजा माफी की याचिका तमिलनाडु के राज्यपाल के पास दो साल से भी ज्यादा समय से लंबित होने पर उच्चतम न्यायालय द्वारा अप्रसन्नता जताये जाने के बाद आयी।

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सात दोषियों में से एक, पेरारिवलन आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। उसने अपनी दया याचिका में माफी मांगी है।

द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने मामले पर शीर्ष अदालत की अप्रसन्नता का हवाला देते हुए कहा, ‘‘राज्यपाल को पेरारिवलन सहित सात दोषियों की रिहाई पर तेजी से फैसला करना चाहिए।’’

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उन्होंने अन्नाद्रमुक सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि वह ‘‘मूकदर्शक न बने, कम से कम अब से’’ और पुरोहित से आग्रह करे।

उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘‘राज्यपाल का राजीव गांधी मामले में सात दोषियों की रिहाई पर फैसला अनिश्चित काल के लिए विलंबित करना ‘अमानवीय’ है और यह उनकी शक्तियों का उल्लंघन है।’’

पीएमके संस्थापक नेता एस रामदास ने कहा कि शीर्ष अदालत के ‘शब्दों’ ने उनकी रिहाई के लिए उम्मीद की एक नई किरण दी है।

राज्यपाल सातों दोषियों की रिहाई की सिफारिश करने वाले मंत्रिमंडल के नौ सितंबर 2018 के प्रस्ताव पर निर्णय विलंबित कर रहे हैं।

पार्टी के शीर्ष नेता ने कहा कि जब दो सप्ताह की अवधि में फैसला लिया जा सकता है, तो इसमें देरी करना और दो वर्ष से अधिक समय में निर्णय नहीं लेना अस्वीकार्य है।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार को पुरोहित को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दोषियों की प्रस्तावित रिहाई का बहु-अनुशासनिक निगरानी एजेंसी (एमडीएमए) की जांच से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्यपाल उनकी रिहाई को मंजूरी दें।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा, ‘‘हम इस समय अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करना चाहते लेकिन हम इस बात से खुश नहीं है कि तमिलनाडु सरकार की सिफारिश दो साल से लंबित है।’’

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