सहारनपुर (उप्र), 15 जून देश के प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने अपने यहां पढ़ रहे छात्रों के बाहर जाकर अंग्रेजी जैसे अन्य पाठ्यक्रम की पढाई करने पर पाबंदी लगा दी है और कहा है कि इससे संस्थान की तालीमी व्यवस्था प्रभावित होती है।
संस्थान ने यह स्पष्ट किया है कि उसने यह प्रतिबंध इसलिए लगाया है क्योंकि छात्रों द्वारा दूसरे कोर्स पढ़ने के लिए बाहर जाने से इस्लामी शिक्षण संस्थान की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है।
दारुल उलूम देवबंद के शिक्षा विभाग द्वारा 12 जून को जारी एक आदेश में कहा गया है, "छात्रों को सूचित किया जाता है कि दारुल उलूम देवबंद में शिक्षा ग्रहण करते हुए दूसरे किसी तालीम (इंग्लिश आदि) की इजाजत नहीं होगी। अगर कोई छात्र इस काम में लिप्त पाया गया या विश्वस्त सूत्रों से उसके इस अमल की निशानदेही होगी तो उसे निष्कासित कर दिया जाएगा।"
आदेश में यह भी कहा गया है, "शिक्षण अवधि में कोई भी छात्र कक्षा को छोड़कर अपने कमरे में न रहे । दारुल उलूम प्रशासन किसी भी वक्त किसी भी कमरे का मुआयना कर सकता है। अगर कोई छात्र कक्षा के बदले अपने कमरे में पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’’
इसमें कहा गया है कि अगर कोई छात्र कक्षा में हाजिरी बोलकर सबक खत्म होने से पहले चला गया या घंटे के आखिर में हाजिरी दर्ज कराने के लिए कक्षा में दाखिल होता पाया गया तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
मामले को लेकर मीडिया में चर्चा होने के बाद दारुल उलूम देवबंद ने इस पर अपनी सफाई भी पेश की है।
संस्थान के मोहतमिम (मुख्य कर्ताधर्ता) मौलाना अब्दुल कासिम नोमानी ने 'पीटीआई- ' को बताया, "कुछ मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि दारुल उलूम देवबंद में अंग्रेजी पढ़ने पर पाबंदी लगा दी गई है, लेकिन ऐसा नहीं है। दारुल उलूम में बाकायदा अंग्रेजी का एक अलग विभाग है और बच्चों को इसकी तालीम दी जा रही है।"
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