विदेश की खबरें | सीपीएन (माओवादी केंद्र) ने प्रचंड के खिलाफ मामला दर्ज करने संबंधी न्यायालय के आदेश पर आपत्ति जताई
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

काठमांडू, पांच मार्च नेपाल में सत्तारूढ़ सीपीएन (माओवादी केंद्र) ने उच्चतम न्यायालय के उस आदेश पर आपत्ति जताई है, जिसमें दशक भर चले विद्रोह के दौरान पांच हजार लोगों की मौत की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘‘प्रचंड’’ के खिलाफ रिट याचिका पंजीकृत करने का आदेश दिया गया था।

उच्चतम न्यायालय प्रशासन द्वारा दो वकीलों की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करने के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ईश्वर प्रसाद खतिवडा और हरि प्रसाद फुयाल की पीठ ने शुक्रवार को अदालत के प्रशासन को याचिका पंजीकृत करने का आदेश दिया था।

पार्टी के महासचिव देव गुरुंग ने एक बयान में कहा, ‘‘हम ऐसी गतिविधियों की निंदा करते हैं, जो नेपाल के संविधान द्वारा गारंटीकृत धर्मनिरपेक्षता, समावेशिता और लोकतांत्रिक गणतंत्र प्रणाली की उपलब्धियों के खिलाफ हैं।’’

प्रचंड ने 15 जनवरी, 2020 को काठमांडू में एक कार्यक्रम में कहा था, “ मुझ पर 17,000 लोगों की हत्या का आरोप लगाया जाता है, जो सच नहीं है। हालांकि, मैं संघर्ष के दौरान पांच हजार लोगों की मौत की जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं।”

संघर्ष के पीड़ित वकीलों ज्ञानेंद्र आराण और कल्याण बुधाठोकी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन अदालत के प्रशासन ने पिछले साल नवंबर में उन्हें पंजीकृत करने से मना कर दिया था।

उच्चतम न्यायालय ने विद्रोह के दौरान पांच हजार लोगों की मौत की जिम्मेदारी लेने वाले प्रधानमंत्री प्रचंड के खिलाफ एक रिट याचिका पंजीकृत करने का शुक्रवार को अपने प्रशासन को आदेश दिया था।

विद्रोह 13 फरवरी 1996 को शुरू हुआ था और 21 नवंबर 2006 को सरकार के साथ व्यापक शांति समझौता होने के बाद आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया था।

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