नयी दिल्ली, 24 नवंबर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने कारोबारी घरानों को बैंकिंग का लाइसेंस देने के आरबीआई के प्रस्ताव को लेकर मंगलवार को सरकार पर निशाना साधते हुए इसे पुरातनपंथी कदम बताया और सरकार से इसकी अनुमति नहीं देने के लिए कहा।
भाकपा के महासचिव डी राजा ने एक बयान में कहा, ‘‘कारोबारी घरानों को बैंकिंग का लाइसेंस देना पुरातनपंथी फैसला है । नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लगातार कारोबारी समर्थक, नव उदारवादी आर्थिक नीतियों को लागू कर रही है।’’
यह भी पढ़े | Delhi: छेड़छाड़ से तैयार अश्लील फोटो सोशल मीडिया पर डालने की धमकी देकर पैसे ऐंठने के आरोप, 2 गिरफ्तार.
उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के समय देश में सभी बैंकों पर कारोबारी घरानों का नियंत्रण था लेकिन देश की आर्थिक विकास परियोजनाओं में मदद के लिए उनमें से कोई भी आगे नहीं आया।
राजा ने कहा, ‘‘एक तरफ ये निजी बैंक लोगों की बचत रकम को बटोर रहे हैं और निहित हितों के कारण उनके कारोबार को लेकर भी चिंताएं हैं। इस कारण से कई बैंक संकट में है और हितों के टकराव के मुद्दे का सामना करना पड़ रहा है।’’
उन्होंने कहा कि बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने की मांग में भाकपा ने जोर-शोर से भूमिका निभायी थी और एआईटीयूसी और एआईबीईए जैसे ट्रेड यूनियनों ने इस मांग को लेकर संघर्ष किया था।
वाम नेता ने कहा कि आज राष्ट्रीयकृत बैंक आर्थिक विकास के मुख्य इंजन साबित हुए हैं ।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY