नयी दिल्ली, 16 जून उच्चतम न्यायालय पिछले साल जुलाई में गोवा में भाजपा सरकार में शामिल हुये तीन मंत्रियों सहित दस विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की याचिकाओं पर निर्णय लेने का विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई के लिये मंगलवार को सहमत हो गया।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने वीडयो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से गोवा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गिरीश चोडानकर की याचिका पर विधान सभा अध्यक्ष के कार्यालय के साथ ही दस विधायकों को नोटिस जारी किये। इन सभी से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अधिवक्ता साहिल तगोत्रा के जरिये दायर याचिका में अयोग्यता याचिका लंबित होने के दौरान इन 10 विधायकों के विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने पर रोक लगाने का भी अनुरोध किया है।
याचिका में तीन विधायकों-चंद्रकांत कावलेकर, जेनिफर मॉन्सरेट और फिलिप रोड्रिक्स को गोवा में बतौर मंत्री काम करने से रोकने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
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चोडानकर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि पिछले साल जुलाई में इन 10 विधायकों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो तिहाई हिस्सा होने का दावा करते हुये भाजपा के विधायक दल में विलय का निर्णय किया था और तद्नुसार अध्यक्ष को इसकी जानकारी दी थी।
इसी जानकारी के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गोवा विधानसभा में विधायी दल के कथित विलय का संज्ञान लेते हुये इन विधायकों को भाजपा के सदस्यों के साथ सीट आवंटित कर दी थी।
याचिका के अनुसार इन दस में से नौ विधायकों ने 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था और वे चुनाव जीते थे। एक विधायक ने 2019 में विधानसभा के लिये हुये उपचुनाव में विजय हासिल की थी।
अनूप
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