पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: नंदीग्राम से भवानीपुर तक, इन VIP सीटों पर टिकी हैं सबकी निगाहें

कोलकाता: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है. चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने राज्य की सभी विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में मतदान कराने का कार्यक्रम घोषित किया है, जिसके तहत 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को वोट डाले जाएंगे. इस चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) (BJP) के बीच देखा जा रहा है. जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) राज्य में विकास की गति रुकने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) ने मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका जताई है. यह भी पढ़ें: West Bengal Assembly Elections 2026: ममता बनर्जी का आरोप, झारग्राम में चुनाव प्रभावित करने के लिए बाहरी लोगों को ला सकती है बीजेपी

भवानीपुर: ममता और शुभेंदु के बीच 'महामुकाबला'

भवानीपुर सीट इस बार के चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण केंद्र बन गई है. यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है. 2021 में नंदीग्राम से हारने के बाद ममता इसी सीट से उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुँची थीं.

इस बार समीकरण और भी दिलचस्प हो गए हैं क्योंकि भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर से मैदान में उतारा है. यह मुकाबला केवल एक सीट का नहीं, बल्कि दोनों पार्टियों के लिए राजनीतिक वर्चस्व और प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है.

नंदीग्राम: प्रतिष्ठा की जंग फिर हुई तेज

2021 के चुनाव में नंदीग्राम ने पूरे देश का ध्यान खींचा था, जहाँ शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को मात दी थी. इस बार टीएमसी ने अधिकारी को उनके ही घर में घेरने के लिए पवित्र कर (Pabitra Kar) को उम्मीदवार बनाया है, जो कभी शुभेंदु के बेहद करीबी माने जाते थे. अभिषेक बनर्जी खुद इस सीट की कमान संभाल रहे हैं, जिससे यहाँ का मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है.

जादवपुर और मुर्शिदाबाद: त्रिकोणीय संघर्ष की आहट

  • जादवपुर: वामपंथियों के इस पुराने गढ़ में माकपा (CPI-M) वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है. यहाँ टीएमसी के देवव्रत मजुमदार और माकपा के दिग्गज नेता विकास रंजन भट्टाचार्य के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है.
  • मुर्शिदाबाद: यहाँ मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है. टीएमसी की शाओनी सिंह रॉय को भाजपा के गौरी शंकर घोष से कड़ी चुनौती मिल रही है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार सिद्दीकी अली ने मुकाबले को और भी कठिन बना दिया है. यह भी पढ़ें: Bengal Elections 2026: ममता बनर्जी ने भवानीपुर से भरा नामांकन; प्रस्तावकों की सूची में दिखी 'मिनी इंडिया' की झलक (Watch Video)

खड़गपुर सदर: दो 'दादालों' की भिड़ंत

खड़गपुर सदर में भाजपा के कद्दावर नेता दिलीप घोष और टीएमसी के प्रदीप सरकार के बीच मुकाबला है. दोनों ही नेता अपने क्षेत्रों में 'दादा' के नाम से लोकप्रिय हैं और उनका स्थानीय स्तर पर मजबूत प्रभाव है. दिलीप घोष जहाँ अपनी पुरानी जीत को दोहराना चाहते हैं, वहीं प्रदीप सरकार 2021 की हार का बदला लेने के इरादे से मैदान में हैं.

निर्णायक साबित होंगी ये सीटें

पश्चिम बंगाल के इस चुनावी रण में ये प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र न केवल क्षेत्रीय समीकरण तय करेंगे, बल्कि राज्य की भावी सत्ता की दिशा भी निर्धारित करेंगे. दो चरणों का यह मतदान बंगाल की राजनीतिक दिशा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने वाला है, जहाँ हर एक सीट सत्ता के गलियारे तक पहुँचने का रास्ता तय करेगी.