नयी दिल्ली, 22 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पतालों में भर्ती करने से पहले कोविड-19 की जांच के परिणाम प्राप्त करने के लिए पांच-सात दिनों का समय नहीं लिया जा सकता है। अदालत ने आईसीएमआर और आप सरकार को इस प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की एक पीठ ने एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। याचिका में अनुरोध किया गया है कि गर्भवती महिलाओं की जांच के नतीजों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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अदालत ने कहा कि अगर नतीजे देने में पांच से सात दिन का समय लिया जाता है, तब अस्पताल कहेगा कि परिणाम पांच दिन पुराना है और वह फिर से जांच कराने के लिए कहेगा।
पीठ ने इसमें तेजी लाने को कहा और अगली सुनवाई के लिए इसे एक जुलाई को सूचीबद्ध किया। सुनवाई के दौरान न तो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और न ही दिल्ली सरकार ने याचिका पर अपना जवाब दिया।
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अदालत ने उन्हें 12 जून को नोटिस जारी कर सोमवार, 22 जून तक प्रतिक्रिया देने को कहा था।
आईसीएमआर और दिल्ली सरकार का जवाब नहीं मिलने पर अप्रसन्न पीठ ने कहा कि जब नोटिस जारी किया जाता है तो उस पर गंभीरता दिखाएं।
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