उत्तरकाशी/ नयी दिल्ली, 14 जून उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखंड में हिंदू संगठनों की ओर से बुलाई गई ‘महापंचायत’ को रोकने और एक विशेष समुदाय के सदस्यों को कथित रूप से निशाना बनाते हुए नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करने से बुधवार को इनकार कर दिया। वहीं स्थानीय प्रशासन ने शहर में निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
यह ‘महापंचायत’ बृहस्पतिवार को पुरोला शहर में होनी है, हालांकि प्रशासन ने इसके लिए अनुमति नहीं दी है।
गत 26 मई को दो लोगों द्वारा एक हिंदू लड़की के कथित अपहरण की कोशिश के बाद से उत्तरकाशी जिले के पुरोला और कुछ अन्य शहरों में सांप्रदायिक तनाव है। अपहरण की कोशिश करने वालों में एक व्यक्ति मुसलमान था।
हालांकि लड़की को छुड़ा लिया गया और आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था लेकिन इसके बाद से स्थानीय व्यापार निकायों और दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों ने पुरोला, बरकोट, चिन्यालीसौड़ और भटवाड़ी सहित आस पास के शहरों में ‘‘लव जिहाद’’ के खिलाफ अभियान चलाया है।
उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की अवकाशकालीन पीठ ने अधिवक्ता शारुख आलम से कानून में उपलब्ध विकल्पों को चुनने और उच्च न्यायालय अथवा किसी अन्य प्राधिकरण के पास जाने को कहा।
पीठ ने कहा, ‘‘हम कानूनी प्रक्रियाओं के विपरीत नहीं जाना चाहते। उच्च न्यायालय है और जिला प्रशासन है, आप उनसे संपर्क कर सकते हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और आपको क्या लगता है कि अगर मामला उसके संज्ञान में लाया जाता है तो कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। आपको उच्च न्यायालय में विश्वास रखना चाहिए।’’
इस पर आलम ने कहा कि पोस्टर और पत्रों के जरिए एक विशेष समुदाय के सदस्यों को उत्तरकाशी छोड़ने के लिए कहा गया है और नफरत फैलाने वाले भाषणों के मामले में पुलिस को स्वत: संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए लेकिन उसकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा, ‘‘उपलब्ध सामग्री से पता चलता है कि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की आवश्यकता है। 15 जून को एक महापंचायत होने वाली है और उन्होंने जिला प्रशासन को 15 जून तक एक विशेष समुदाय के सदस्यों को हटाने का अल्टीमेटम दिया है।’’
महापंचायत से पहले पुरोला के उप जिलाधिकारी देवानंद शर्मा ने कहा कि 19 जून तक धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू रहेगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग शांति भंग करने की कोशिश कर सकते हैं इसलिए धारा 144 लागू की गई है।
विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और देवभूमि रक्षा अभियान जैसे संगठनों ने ‘‘लव जिहाद’’ के खिलाफ बृहस्पतिवार को महापंचायत बुलाई है।
पुरोला में 26 मई को अपहरण की कोशिश के अलावा, उत्तरकाशी जिले के आराकोट क्षेत्र में आठ जून को नवाब नामक व्यक्ति द्वारा नेपाली मूल की दो नाबालिग बहनों के अपहरण की कोशिश करने का मामला सामने आया था।
दोनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अपहरण की कोशिश की इन घटनाओं के बाद पुरतला में मुसलमानों द्वारा संचालित 40 से अधिक दुकानें एक पखवाड़े के बाद भी नहीं खुली हैं।
मुसलमानों की दुकानों पर पिछले सप्ताह पोस्टर लगाकर उनसे कहा गया है कि वे महापंचायत से पहले शहर छोड़ दें या परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी अभिषेक रोहिल्ला और पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी ने सोमवार को पुरोला में अधिकारियों व लोगों से मुलाकात कर शांति बनाए रखने की अपील की।
मुसलमानों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन ‘मुस्लिम सेवा संगठन’ ने भी 18 जून को देहरादून में महापंचायत करने का आह्वान किया है।
वहीं उत्तराखंड वक्फ बोर्ड और राज्य हज कमेटी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील की कि सांप्रदायिक तनाव से जूझ रहे पुरोला कस्बे में मुसलमानों का ‘‘उत्पीड़न’’ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
शोभना वैभव
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