देश की खबरें | न्यायालय का वेब सीरीज मे सुब्रत रॉय के नाम के इस्तेमाल पर रोक के खिलाफ नेटफ्लिक्स की याचिका पर सुनवाई से इंकार
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, दो सितंबर उच्चतम न्यायालय ने आगामी वेब सीरीज ''बैड बॉय बिलेनियर्स'' में सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय के नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाने के बिहार की अदालत के आदेश के खिलाफ नेटफ्लिक्स की याचिका पर सुनवाई करने से बुधवार को इंकार कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबड़े, न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुये नेटफ्लिक्स की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, पीठ ने नेटफ्लिक्स को बिहार के अररिया जिले की अदालत के आदेश के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय जाने की छूट प्रदान की है।

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पीठ ने अपील खारिज करते हुए कहा, ''खारिज, हमें खेद है। ''

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘याचिकाकर्ता (नेटफ्लिक्स इंटरटेनमेन्ट सर्विसेज इंडिया लि) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने याचिका वापस लेने और कानून के अनुसार उपलब्ध उचित उपाय अपनाने का अनुरोध किया। अनुरोध स्वीकार किया जाता है।

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‘‘हालांकि, हम यह स्पष्ट करते हैं कि जब याचिकाकर्ता इस तरह के उपाय का रास्ता अपनायेगा तो संबंधित अदालत अपने हिसाब से तेजी से इस मामले पर गौर करेगा। याचिका इस छूट के साथ खारिज की जाती है क्योंकि इसे वापस ले लिया गया है।’’

नेटफ्लिक्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ के बताया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में वेब सीरीज से संबंधित कई याचिकाएं लंबित हैं और शीर्ष अदालत को इन मामलों को अपने पास स्थानांतरित कर लेना चाहिये ।

पीठ ने विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के स्थानांतरण की नेटफ्लिक्स की अलग-अलग याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है।

सहारा इंडिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने नेटफ्लिक्स की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में दिवानी न्यायाधीश ने आदेश पारित किया है और जिला न्यायाधीश के समक्ष अपील दायर की जा सकती है न की उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के समक्ष।

नेटफ्लिक्स दो सितंबर को भारत में रिलीज होने जा रही इस वेब सीरीज का प्रमोशन कर रही है। इसमें कहा गया है: ''इस खोजी डॉक्यूमेंट्री में भारत के सबसे कुख्यात कारोबारियों को बनाने और खत्म करने वाले लालच, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार को दिखाया गया है।''

सहारा समूह की दो कंपनियों-सहारा इंडिया रियल इस्टेट कार्पोरेशन ओर सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कार्प लि -द्वारा अपने निवेशकों को 25,000 करोड़ रूपए वापस करने के शीर्ष अदालत के 31 अगस्त, 2012 के आदेश का अनुपालन करने में विफल रहने के कारण सुब्रत रॉय और दो निदेशकों को गिरफ्तार किया गया था।

रॉय को शीर्ष अदालत ने चार मार्च 2014 को तिहाड़ जेल भेज दिया था और वह दो साल जेल में बिताने के बाद वह अपनी मां के अंतिम संस्कार की रस्मों के लिये छह मई, 2016 को पेरोल पर छूटे थे।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 28 अगस्त को करीब दो अरब अमेरिकी डालर के पीएनबी घोटाले में आरोपी मेहुल चोकसी की याचिका खारिज की थी।

उच्च न्यायालय ने चोकसी को कोई राहत देने से इंकार करते हुये कहा था कि निजी अधिकार लागू कराने के लिये रिट अधिकार विचार योग्य नहीं है।

गीतांजलि जेम्स का प्रवर्तक, चोकसी और उसका भांजा नीरव मोदी 13,500 करोड़ रुपये पीएनबी धोखाधड़ी मामले में आरोपी हैं।

चोकसी पिछले साल देश छोड़ कर भाग गया था और उसे एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता दी गई थी।

अनूप

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