देश की खबरें | न्यायालय ने एनएलयू, जोधपुर के छात्र की रहस्यमय मौत की नयी जांच का आदेश दिया, मामला बंद करने की रिपोर्ट खारिज की
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 16 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने जोधपुर की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के तीसरे वर्ष के छात्र की संदिग्ध अवस्था में मौत के मामले में राजस्थान पुलिस की जांच बंद करने संबंधी रिपोर्ट बुधवार को खारिज कर दी और मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि समाज में कानून के शासन के प्रति विश्वास बनाये रखने के लिये यह जरूरी है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में जांचकर्ताओं के दल द्वारा नये सिरे से जांच की जाये और यह आज से दो महीने के भीतर पूरी की जाये।

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न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, ‘‘मामला बंद करने की रिपोर्ट, जिसमें इस मृत्यु को हत्या बताया गया है लेकिन कोई सुराग नहीं, निश्चित ही यह जल्दबाजी की कार्रवाई है और पूरी जांच में वास्तविकता का अभाव है।’’

पीठ ने आगे कहा, ‘‘न्याय के हित में इसलिए नये सिरे से जांच जरूरी है ताकि समाज में कानून के शासन के प्रति विश्वास कायम रहे, भले ही इसमें कोई भी शामिल क्यों नहीं हो।’’

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मामला 13 अगस्त 2017 का है। कानून का छात्र विक्रांत नगाइच (21) विश्वविद्यालय परिसर से करीब 300 मीटर दूर स्थित एक रेस्त्रां में शाम के वक्त अपने दोस्तों के साथ गया था। उसके बाद वह लौटा नहीं। अगली सुबह उसका शव रेल पटरियों पर मिला।

शीर्ष अदालत ने गत आठ सितंबर को इस मामले में राजस्थान पुलिस की ओर से पेश रिपोर्ट देखने के बाद कहा था कि इसकी फिर से जांच करने की जरूरत है। उसने कहा था, ‘‘हम पुन: जांच करने के लिए कह सकते हैं। यह कोई तरीका नहीं है।’’

मामले की सुनवाई के दौरान मृतक छात्र की मां की ओर से पेश अधिवक्ता सुनील फर्नांडिस ने कहा था कि मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने यह मामला राजस्थान पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया था।

न्यायालय ने जुलाई में कहा था कि मामले की जांच दो महीने में पूरी हो जानी चाहिए और उसके समक्ष अंतिम रिपोर्ट पेश की जानी चाहिए। इसके बाद ही राजस्थान पुलिस ने अपनी रिपोर्ट पेश की थी।

न्यायालय ने अपने फैसले में इस तथ्य का संज्ञान लिया कि पुलिस द्वारा दाखिल मामला बंद करने की रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि यह मानव वध है लेकिन उसका निष्कर्ष है कि यह अपराध करने वाले का कोई सुराग नहीं है।

शीर्ष अदालत के पहले के फैसले का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिये निष्पक्ष जांच संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त मौलिक अधिकार का हिस्सा है। पीठ ने कहा कि मामला बंद करने की रिपोर्ट निश्चित ही जल्दबाजी में की गयी कार्रवाई है।

पीठ ने इस तथ्य का भी जिक्र किया है कि पुलिस ने पहले राजस्थान उच्च न्यायालय में और फिर तीन जुलाई को शीर्ष अदालत में अपने हलफनामे में दलील दी थी कि यह दुर्घटनावश हुयी मौत थी। लेकिन अब तीन सितंबर 2020 की मामला बंद करने संबंधी रिपोर्ट में इसे मानव वध स्वीकार किया गया है जिसका सुराग नहीं है।

विक्रांत की मां एवं याचिकाकर्ता नीतू कुमार नगाइच ने मांग की कि सीबीआई को यह निर्देश दिया जाए कि वह ‘‘अप्राकृतिक मौत के रहस्य को सुलझाने के लिए’’ सभी कदम उठाए।

याचिका में कहा गया कि इस मामले में प्राथमिकी दस महीने की देरी से, जून 2018 में दर्ज की गई। इसमें कहा गया कि जिस तरह से जांच की गई उससे ऐसी आशंका होती है कि यह कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने की कोशिश का परिणाम है।

इसमें कहा गया, ‘‘लगभग तीन साल बीत जाने के बावजूद आरोप-पत्र तक दाखिल नहीं किया गया। जांच भी आगे नहीं बढ़ी है। अपराधियों को पकड़ने के कोई प्रयास नहीं किए गए।’’

याचिका में पुलिस जांच के दौरान कई कथित खामियों का भी जिक्र किया गया था।

अनूप

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