देश की खबरें | अदालत ने ग्रामीणों की शिकायत पर मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया

जबलपुर (मध्यप्रदेश), 26 जून मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने सिवनी जिले के एक गांव में रोजगार के अवसरों की कमी और खराब आधारभूत ढांचे के बारे में वहां के निवासियों से प्राप्त एक पत्र पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया और शुक्रवार को प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करके छह जुलाई से पहले जवाब तलब किया।

अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेद्र यादव ने बताया कि याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ए के मित्तल और न्यायमूर्ति वी के शुक्ला की खंडपीठ ने मध्यप्रदेश सरकार के साथ—साथ सिवनी कलेक्टर तथा सिवनी जिले के जिला एवं जनपद के मुख्य कार्यपालन आधिकारियों (सीईओ) को नोटिस जारी किया है और छह जुलाई से पहले जवाब देने को कहा है।

यह भी पढ़े | चीनी उत्पादों के बहिष्कार के डर से Xiaomi ने अपने स्टोर्स पर लिखा 'मेड इन इंडिया'.

उन्होंने कहा कि अदालत ने इस याचिका पर अगली सुनवाई छह जुलाई को करना निर्धारित किया है।

यादव ने बताया कि गांव के संबंध में सिवनी के घंसौर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले पयाली गांव के निवासियों ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को 18 जून 2020 को पत्र लिखा था। अदालत ने इसकी सुनवाई करते हुए सरकार को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

यह भी पढ़े | Earthquake in Ladakh: लद्दाख में भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 4.5 रही तीव्रता- कारगिल से 200 किमी उत्तर-पश्चिम में था केंद्र.

उन्होंने कहा कि पत्र में कहा गया था कि उनके गांव में रोजगार के कोई संसाधन नहीं हैं। पूरे गांव में प्रधानमंत्री आवास निर्माण योजना के तहत एक भी मकान का निर्माण नहीं हुआ है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत कुछ शौचालय का निर्माण हुआ है, जिनमें से कुछ शौचालय भी अधूरे पड़े हुए हैं। लोगों को खुले में या नर्मदा नदी के किनारे शौच के लिए जाना पड़ता है।

यादव ने बताया कि इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि गांव तक सड़क नहीं है, जिसके कारण दूसरे गांव में पढ़ने जाने वाले छात्रों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)