देश की खबरें | ‘धर्म’ को परिभाषित करने के लिये वयोवृद्ध की याचिका न्यायालय ने खारिज की
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने ‘धर्म’ को परिभाषित करने के लिये एक वयोवृद्ध की याचिका पर मंगलवार को विचार करने से इंकार कर दिया। याचिका में कहा गया था कि ‘धर्म’ को परिभाषित करने से देश मे शांति कायम होगी।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ के समक्ष 87 वर्षीय वयोवृद्ध रमेशचंद्र विट्ठलदास शेठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से कहा कि संविधान में अनेक अनुच्छेद धर्म के बारे में हैं लेकिन कहीं भी इसे परिभाषित नहीं किया गया है।

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पीठ ने कहा कि वह याचिकाकर्ता की उम्र का सम्मान करती है लेकिन न्यायालय उस क्षेत्र में नहीं जा सकती जिसके लिये वह हकदार नहीं है।

याचिका पर सुनवाई के दौरान शेठ ने पीठ से कहा कि अगर न्यायालय ‘धर्म’ को परिभाषित करेगा तो देश में कहीं भी सांप्रदायिक दंगे नही होंगे और अंतत: इससे अमन चैन कायम होगा।

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प्रधान न्यायाधीश ने शेठ से सवाल किया कि वह उम्र के इस पड़ाव पर यह सवाल क्यों उठा रहे हैं।

इस पर वयोवृद्ध याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने 50 साल तक लोगों को धर्म के बारे में पढ़ाया है और वह समझता है कि इस शब्द को परिभाषित किये जाने से शांति कायम होगी।

पीठ ने कहा कि उसके पास इस विषय पर विचार करने का अनुभव नहीं है और बेहतर होगा कि वह इस संबंध में केन्द्र सरकार के पास प्रतिवेदन दे।

शेठ ने कहा कि उन्होंने इस बारे में केन्द्र को प्रतिवेदन दिये थे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला ।

पीठ ने शेठ से कहा कि वह इस याचिका को वापस ले लें अन्य इसे खारिज कर दिया जायेगा।

शेठ ने कहा कि वह याचिका वापस नहीं लेना चाहेंगे, इस पर न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया।

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