नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने समाज के अन्य वर्गों के लिए शुरू की गई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की तुलना में दिव्यांग जनों के लिए शुरू किये गए इसी तरह के कार्यक्रमों पर केंद्र को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आंकड़े एकत्र करने का सोमवार को निर्देश दिया।
न्यायालय ने अन्य समान सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत दी जा रही सहायता की तुलना में दिव्यांग जनों को 25 प्रतिशत अधिक सहायता मुहैया करने का प्रावधान करने वाले कानून के क्रियान्वयन का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र से छह हफ्तों के अंदर आंकड़े एकत्र करने और एक स्थिति रिपोर्ट सौंपने को कहा।
शीर्ष न्यायालय ने 25 सितंबर को केंद्र को नोटिस जारी करते हुए, दिल्ली स्थित गैर लाभकारी संगठन भूमिका ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका पर उसका जवाब मांगा।
पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इस विषय में शीर्ष न्यायालय की सहायता करने का आग्रह किया था।
न्यायालय ने उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता ने दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम,2016 की धारा 24(1) के उपबंध का सहारा लिया है।
इस अधिनियम की धारा 24 के अनुसार, ‘‘उपयुक्त सरकार दिव्यांग जनों के अधिकार की रक्षा करने के लिए अपनी आर्थिक क्षमता के दायरे में आवश्यक योजनाएं व कार्यक्रम तैयार करेगी, ताकि उन्हें समुदाय में स्वतंत्र रूप से रहने में सक्षम बनाना जा सके...यह प्रावधान करता है कि दिव्यांग जनों को इस तरह की योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत सहायता की मात्रा अन्यों पर लागू समान योजनाओं की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत अधिक होगी।’’
संगठन के प्रमुख जयंत सिंह राघव ने याचिका में, विभिन्न राज्यों द्वारा दी जा रही दिव्यांग पेंशन का हवाला दिया है।
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