देश की खबरें | अदालत ने गुजरात सरकार से कानून के अनुसार ऑनलाइन जुए से निपटने के लिए कहा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

अहमदाबाद, 13 अक्टूबर गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह ऑनलाइन जुए के मुद्दे को देखे और इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, बड़े जनहित में कानून के अनुसार कार्रवाई करे।

अदालत ने कहा कि मौजूदा गुजरात जुआ रोकथाम अधिनियम-1887 इस मुद्दे पर, विशेष रूप से ऑनलाइन रमी पर पूरी तरह से चुप है। अदालत ने कहा कि इंटरनेट जुए से भी उसी तरह की कई चिंताएं सामने आई हैं, जैसी चिंताएं पारंपरिक जुआ गतिविधियों से पूरे साल पैदा होती हैं।

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मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की खंडपीठ ने 29 सितंबर के अपने आदेश में कहा कि कहा कि चूंकि उच्चतम न्यायालय ने रमी को कौशल का खेल माना है, तो प्रश्न यह उठता है कि क्या खेला जा रहा है, यह सही अर्थों में रमी है या यह सिर्फ जुआ है।

पीठ ने गुजरात सरकार को जुए वाले ऑनलाइन खेल के मुद्दे से निपटने का निर्देश दिया क्योंकि खेल भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची दो के अनुसार राज्य सरकार का विषय है।

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उन्होंने कहा, "अगर कोई भी वेबसाइट गुजरात राज्य से संचालित हो रही है या किसी जुए के खेल में लगी हुई है, तो राज्य इससे कानून, नियमों, विनियमों और नीति के अनुसार निपटेगा।’’

अदालत ने कहा कि राज्य यह भी जांच करेगा कि इस तरह के खेल के परिणामस्वरूप धन-शोधन या विदेशी मुद्रा से संबंधित कानूनों का उल्लंघन होता है या नहीं।

अदालत ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि राज्य सरकार उक्त मुद्दों पर तुरंत गौर करेगी और बिना देर किए कानून के अनुसार बड़े जनहित में उचित निर्णय लेगी।"

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