जरुरी जानकारी | महामारी के दौरान देशों को राजकोषीय उदारता बरतने की जरूरत: एन के सिंह

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर पंद्रहवें वित्त आयोग के चेयरमैन एन के सिंह ने बुधवार को कहा कि दुनिया की सरकारों को कोविड-19 महामारी के दौरान राजकोषीय उदारता अपनाने की आवश्यकता है। पर उन्होंने यह भी कहा कि बहुपक्षीय संस्थानों (संयुक्तराष्ट्र,विश्वबैंक आदि) के लिये इसको लेकर नियम तय करना एक चुनौती है।

सिंह ने कहा कि इससे पहले, सबसे बड़ी महामारी 102 साल पहले आयी स्पेनिश फ्लू थी। यह संयुक्तराष्ट्र, विश्वबैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के अस्तित्व में आने से पहले की बात है। ऐसे में बहुपक्षीय संस्थानों को इस प्रकार की महामारी से जुड़ी चुनौतियों का सामना पहली बार करना पड़ रहा है।

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राष्ट्रमंडल देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘...महामारी के संदर्भ में हमें न केवल राजकोषीय शुद्धता पर ,बल्कि राजकोषीय उदारता पर भी ध्यान देना होगा।’’

सिंह ने कहा कि इस तरह की महामारी की जटिलताओं को संभालने को लेकर पहले का कोई मिसाल नहीं है।

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उन्होंने कहा, ‘‘इन संस्थानों के लिये पहली चुनौती राजकोषयीय उदारता (सहनशीलता) के नियम तय करने को लेकर है। ऐसे नियम जो निष्पक्ष, उपयुक्त और सुसंगत हो। ऐसे नियम जो स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थिति का समाधान करें, आर्थिक पुनरूद्धार का निर्माण करें, वित्तीय झटकों को सहन करें, उसकी प्रकृति का समाधान करें और अंतरराष्ट्रीय कर्ज ढांचे की बनावट में सुधार लायें।’’

सिंह ने कहा कि अस्थायी तौर पर कर्ज अदायगी नहीं होने से जुड़े राजकोषीय प्रभाव के पक्ष में दलीलें देना आसान है लेकिन महामारी में कमी आने की शुरूआत के साथ चीजों को पटरी पर लाना भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘ राजकोषीय सहनशीलता अपनाना जरूरी है और इसके पक्ष में तर्क देना भी आसान है पर यह भी जरूरी है कि महामारी का प्रभाव खत्म होने के बाद यथाशीघ्र सीधे रास्ते पर लौट आया जाए...।’’

सिंह ने वित्तीय नियमों को लागू करने को लेकर वित्तीय परिषद जैसा एक भरोसेमंद और स्वतंत्र वित्तीय संस्थान के गठन और क्रियान्वयन व्यवस्था लागू का भी सुझाव दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि महामारी की अनिश्चित प्रकृति को देखते हुए वित्त मंत्रियों के लिये राजकोषीय प्रोत्साहन का उपयुक्त स्तर का पता लगाना एक चुनौती है।

रमण मनोहर

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