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RBI ने अपने एक लेख में कहा, कोरोना महामारी से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है, लेकिन पिछले साल की तरह गंभीर नहीं

कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की आधी अवधि में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित जरूर हुई हैं लेकिन कमजोर नहीं पड़ी हैं। हालांकि संक्रमितों की संख्या पूर्व के मुकाबले कहीं अधिक हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के एक लेख में यह कहा गया है।

RBI ने अपने एक लेख में कहा, कोरोना महामारी से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है, लेकिन पिछले साल की तरह गंभीर नहीं
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Photo Credits- PTI)

मुंबई: कोविड-19 महामारी (Corona Pandemic) की दूसरी लहर से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की आधी अवधि में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित जरूर हुई हैं लेकिन कमजोर नहीं पड़ी हैं. हालांकि संक्रमितों की संख्या पूर्व के मुकाबले कहीं अधिक हैं.  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक लेख में यह कहा गया है. इसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी की रफ्तार ने भारत और दुनिया को अचंभित किया है.  इस तेजी पर अंकुश लगाने के लिये युद्ध स्तर पर अभियान चलाये गये हैं. यह भी पढ़े: कोरोना से जारी जंग के बीच आर्थिक फ्रंट पर अच्छी खबर, 2021-22 में GDP वृद्धि का अनुमान 10.5% पर बरकरार

अर्थव्यवस्था की स्थिति पर आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एम डी पात्रा और अन्य अधिकायों ने अपने लेख में लिखा है, ‘‘दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पहली लहर के मुकाबले सीमित जान पड़ता है। स्थानीय स्तर पर जरूरत के अनुसार ‘लॉकडाउन’, लोगों को घर से काम करने की व्यवस्था के लिये स्वयं को बेहतर तरीके से तैयार करना, ऑनलाइन डिलिवरी मॉडल, ई-वाणिज्य और डिजिटल भुगतान का अच्छे तरीके से काम करना इसके उदाहरण हैं.

आरबीआई ने साफ किया है कि लेख में अभिव्यक्त विचार लेखकों के हैं और कोई जरूरी नहीं है कि वे आरबीआई के विचारों से मेल खाते हों. लेख के अनुसार संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि पर रोक लगाने के लिये कई राज्यों में लगायी गयी पाबंदियो से अप्रैल और मई में वास्तविक अर्थव्यवस्था के कई संकेतक हल्के पड़े। पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर महानगरों, शहरों में तेज रही। यह राज्यों, क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से फैला है.

लेख के अनुसार, ‘‘दूसरी लहर से 2020-21 की पहली तिमाही की आधी अवधि में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित जरूर किया लेकिन उसे कमजोर नहीं किया...सकल मांग की स्थिति पर असर पड़ा है लेकिन वह प्रभाव पहली लहर जैसा गंभीर नहीं है. इसमें कहा गया है, ‘‘हालांकि इस समय स्थिति अभी स्थिर नहीं हुई है। लेकिन जो प्रवत्ति है, उससे यह पता चलता है कि अर्थव्यवस्था की गति पर जो असर पड़ा है, वह उतना गंभीर नहीं है, जितना कि पिछले साल था.

लेख के अनुसार, ‘‘दूसरी लहर का सबसे बड़ा प्रभाव मांग के झटके के संदर्भ में है - आवाजाही पर असर, सोच-विचारकर किये जाने वाले खर्च और रोजगार की कमी। इसके अलावा माल भंडार पर भी असर पड़ा है। जबकि कुल आपूर्ति पर प्रभाव कम पड़ा है.’’ इसमें कहा गया है कि घरेलू व्यापार के बारे में संकेत देना वाला ई-वे बिल में अप्रैल 2021 में मासिक आधार पर 17.5 प्रतिशत की कमी आयी है। पेट्रोल और डीजल बिक्री के प्रारंभिक आंकड़े भी अप्रैल में ईंधन की मांग में नरमी को बताते हैं जिसका कारण आवाजाही पर पाबंदी है.

इसके अलावा यात्री वाहनों के मूल उपकरण विनिर्माताओं ने अप्रैल में मासिक आधार पर गिरावट की सूचना दी है.  माल ढुलाई और यात्रियों की आवाजाही में नरमी आयी है. लेख के अनुसार संक्रमण से अंग्रेजी के अक्षर यू के आकार की स्थिति दिख रही है.  इसमें एक कंधा कृषि और दूसरा आईटी है जो तूफान में मजबूती से खड़े हैं. इसमें कहा गया है कि इस यू में एक ढलान पर संगठित और स्वचालित विनिर्माण की जबकि दूसरी ढलान पर ऐसी सेवाएं हैं जिनकी दूर-दराज के क्षेत्रों में डिलिवरी की जा सकती है और इसके लिये उत्पादकों और उपभोक्ताओं को इधर-उधर जाने की जरूरत नहीं है.

लेख के अनुसार इस यू में सबसे कमजोर स्थिति में हैं - ‘मजदूरों’ (कारखानों, वर्कशॉप, शोरूम जैसे जगहों पर काम करने वाले कामगार) और डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कानून एवं व्यवस्था, नगरपालिका कर्मचारी, तथा दैनिक मेहनत कर आजीविका चलाने वाले छोटे व्यावसायी (संगठित और असंगठित) है जो जिन्हें अपनी आजीविका के लिए जोखिम उठाना पड़ता है। इन क्षेत्र के लोगों के लिये नीतियों के जरिये मदद में प्राथमिकता देनी होगी.

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(The above story first appeared on LatestLY on May 17, 2021 10:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).