लखनऊ, 25 सितंबर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा द्वारा उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू किए जाने के बीच वरिष्ठ नेताओं का पार्टी से पलायन जारी है। इनमें वे नेता भी शामिल हैं जो पीढ़ियों से पार्टी के साथ थे।
दिवंगत कांग्रेस नेता कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेशपति त्रिपाठी पार्टी को अलविदा कहने वाले नए नेता हैं।
इससे पहले, वरिष्ठ कांग्रेस नेता जितेंद्र प्रसाद के बेटे और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो चुके हैं ।
पार्टी के कुछ नेताओं ने राजनीतिक विरोधियों पर, विशेष रूप से ब्राह्मण जाति के नेताओं को पार्टी से तोड़ने का आरोप लगाया है। वहीं, कुछ अन्य नेताओं ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा है कि इन नेताओं को निकट भविष्य में पछतावा होगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ऐसे समय में पार्टी छोड़ रहे हैं जब प्रियंका गांधी 2017 के उप्र विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में इसे बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। 2017 के चुनाव में कांग्रेस 403 सदस्यीय राज्य विधानसभा में केवल सात सीटें जीत सकी थी।
कांग्रेस पहले ही घोषणा कर चुकी है कि आगामी चुनाव में वह केवल कुछ छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ गठजोड़ करेगी।
पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष ललितेशपति त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि उन्होंने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
त्रिपाठी ने कहा था, ‘‘जब मैं कांग्रेस के हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार और नज़रअंदाज होते हुए देखता हूँ तो बहुत तकलीफ होती है, दर्द होता है। इसलिए मैंने यह कदम उठाया है।’’
उन्होंने यह भी कहा था कि उनके परिवार ने जो 100 साल से अधिक समय तक प्रतिबद्धता दिखाई, जिससे दूर जाना उनके लिए एक भावनात्मक निर्णय था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में "जब जिन परिवारों ने पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए अपना खून-पसीना दिया, उनका सम्मान नहीं किया जा रहा, तो ऐसे में उनकी अंतरात्मा उन्हें किसी भी पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देती है।"
बलिया के दो वरिष्ठ नेताओं शैलेंद्र सिंह और राजेश सिंह जैसे कुछ अन्य लोगों ने भी पुराने और वफादार पार्टीजनों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए हाल ही में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
पार्टी की मीडिया सलाहकार टीम के सदस्य द्विजेंद्र त्रिपाठी ने पीटीआई- से कहा, ''ललितेश त्रिपाठी का जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। वह अपने परिवार की चौथी पीढ़ी के नेता हैं जो नेहरू-गांधी परिवार के बहुत करीब थे और उन्हें उचित सम्मान और जिम्मेदारी मिली थी।''
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