(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 20 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने अवमानना मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर हिरासत में लिए गए उत्तर प्रदेश के वित्त विभाग के दो सचिवों को तत्काल रिहा करने का आदेश बृहस्पतिवार को दिया।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति धनंजय वाई. चंद्रचूड़ और न्यायूमर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ के समक्ष मामले पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया।
राज्य की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने पीठ को बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा एक ‘‘अभूतपूर्व आदेश’’ पारित किया गया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के वित्त सचिव और विशेष सचिव (वित्त विभाग) को अवमानना मामले में हिरासत में ले लिया गया। अवमानना का यह मामला उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं से संबंधित है।
नटराज ने कहा कि उच्च न्यायालय ने मामले में राज्य के मुख्य सचिव के खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किया है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘नोटिस जारी करें, जिस पर 28 अप्रैल 2023 तक जवाब दाखिल किया जाए। मामला सूचीबद्ध किए जाने की अगली तारीख तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ के चार अप्रैल 2023 और 19 अप्रैल 2023 के आदेश के अनुपालन पर रोक रहेगी... उत्तर प्रदेश सरकार के जिन अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।’’
पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत के रजिस्ट्रार इस आदेश को तत्काल अनुपालन के लिए टेलीफोन या ईमेल के माध्यम से उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भेजें।
बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी दोनों अधिकारियों की रिहाई का आदेश दिया।
‘एसोसिएशन ऑफ रिडायर्ड सुप्रीम कोर्ट एंड हाई कोट जजेज’ और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार ने कहा, ‘‘यह सूचित किया गया है कि चार अप्रैल, 2023 और 19 अप्रल, 2023 को इस अदालत द्वारा पारित आदेश पर उच्चतम न्यायालय के 20 अप्रैल, 2023 के आदेश के माध्यम से सूचीबद्ध होने की अगली तारीख तक रोक लगा दिया गया है।’’
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘आगे, हिरासत में लिए गए उत्तर प्रदेश सरकार के दो अधिकारियों को रिहा कर दिया जाए।’’
गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने 19 अप्रैल के अपने आदेश में कहा था कि हलफनामे में दिए गए बयान और अधिकारियों के आचरण प्रथम दृष्टया अदालत की आपराधिक अवमानना’’ करने वाले प्रतीत होते हैं।
उसने कहा था कि अदालत में मौजूद अधिकारियों- उत्तर प्रदेश के सचिव (वित्त) शाहिद मंजर अब्बास रिजवी और विशेष सचिव (वित्त) सरयू प्रसाद मिश्रा को हिरासत में लिया जाए और उन्हें 20 अप्रैल को पूर्वाह्न 11 बजे आरोप तय करने के लिए अदालत में पेश किया जाए।
अदालत ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, लखनऊ और अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त विभाग), उत्तर प्रदेश, लखनऊ डॉक्टर प्रशांत त्रिवेदी के खिलाफ संबंधित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से जमानती वारंट जारी किए जाएं, ताकि 20 अप्रैल, 2023 को इस अदालत में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।’’
अदालत ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि उनके खिलाफ आरोप क्यों नहीं तय किए जाएं।
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