बेंगलुरु, दो सितंबर बेंगलुरु में पिछले महीने हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धरमैया ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस विधानमंडल के आगामी मानसून सत्र में यह मुद्दा उठाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, डी जे हल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को गये जहां 11 अगस्त की रात को दंगाइयों ने आगजनी की थी। इस दंगे के दौरान कांग्रेस नेता कोविड-19 के उपचार से गुजर रहे थे।
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘ मैं सरकार से अपील करता हूं कि यथाशीघ्र जांच हो और यह निष्पक्ष ढंग से होनी चाहिए एवं दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि कोई भी हो और वह कितना भी बड़ा आदमी क्यों न हो, यदि दोषी है तो उसे दंडित किया जाना चाहिए लेकिन निर्दोष लोगों को सजा नहीं मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह इस घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की मांग कर चुके हैं ताकि सच्चाई सामने आये और ‘आज भी मैं उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के नेतृत्व में न्यायिक आयोग की मांग करता हूं।’’
एक प्रश्न के उत्तर में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ हम विधानसभा में यह मुद्दा (बेंगलुरु हिंसा का मुद्दा) उठायेंगे।’’
विधानमंडल का मानसून सत्र 21 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा।
कांग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे पी नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर कथित रूप से किये गये भड़काऊ पोस्ट को लेकर 11 अगस्त की रात को सैंकड़ों लोगों ने हिंसा की थी। पुलिस ने हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली चलायी थी जिसमें तीन लोगों की जान चली गयी थी।
डी जे हल्ली में दंगाइयों ने विधायक के निवास और थाने में आग लगा दी थी। उन्होंने विधायक और उनकी बहन का सामान लूटने के साथ ही पुलिस और निजी वाहनों को भी फूंक दिया था।
जब सिद्धरमैया से इस घटना में कांग्रेस पार्षदों की कथित संलिप्तता के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जब तक यह साबित नहीं हो जाता या सबूत सामने नहीं आते तब तक किसी पर कैसे आरोप लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं किसी पार्टी के बारे में बात नहीं करना चाहता... जांच अभी प्राथमिक चरण में है। हम भाजपा नेताओं की तरह ऐसी चीजें नहीं कह सकते। ’’
सिद्धरमैया के बयान पर उनके आलोचक रहे भाजपा महासचिव बी एस संतोष ने अपना यह आरोप दोहराया कि उन्होंने दंगाइयों की निंदा नहीं की जिन्होंने उनकी ही पार्टी के दलित विधायक मूर्ति के घर पर हमला किया।
संतोष ने ट्वीट किया, ‘‘ कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री मामूली बातों पर भी विध्वंस एवं दंगे की बस मंजूरी देते हैं। ऐसे में आश्चर्य की बात नहीं है, कि उन्हें कर्नाटक के मतदाताओं ने सत्ता से निर्णायक ढंग से बेदखल कर दिया। वह अपनी ही पार्टी के दलित विधायक पर हमले या दंगे की निंदा नहीं कर सकते, वह दंगाइयों की पीठ ठोकते हैं।’’
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